सेक्स वर्क भी एक पेशा, पुलिस बेवजह न करे परेशान
ब्यूरो रिपोर्ट नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: सेक्स वर्क भी एक पेशा, पुलिस बेवजह न करे परेशान
⚖️ वयस्क और सहमति से सेक्स वर्क करने वालों को कानून का समान संरक्षण — गरिमा और सम्मान से जीने का अधिकार
नई दिल्ली | SvasJsNews
सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्क से जुड़े लोगों के अधिकारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि वयस्क व्यक्ति द्वारा अपनी इच्छा और सहमति से किया जाने वाला सेक्स वर्क अपने आप में अपराध नहीं है। ऐसे व्यक्तियों को भी संविधान के तहत गरिमा, सम्मान और कानून के समान संरक्षण का अधिकार प्राप्त है।
👮 पुलिस को बेवजह हस्तक्षेप से बचने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई सेक्स वर्कर वयस्क है और अपनी सहमति से इस कार्य में शामिल है, तो पुलिस को अनावश्यक रूप से उसके काम में हस्तक्षेप या उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। पुलिस को सेक्स वर्कर्स के साथ मौखिक या शारीरिक दुर्व्यवहार, हिंसा अथवा जबरदस्ती से बचना होगा।
🏛️ शिकायत पर भी मिलेगी समान कानूनी सुरक्षा
यदि कोई सेक्स वर्कर किसी अपराध, विशेषकर यौन अपराध की शिकायत करती है, तो पुलिस को उसकी शिकायत को गंभीरता से लेकर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। यौन हिंसा की पीड़िता को अन्य पीड़ितों की तरह आवश्यक चिकित्सा एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।

⚠️ लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर गतिविधि कानूनी है
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि मानव तस्करी, नाबालिगों का शोषण या कानून द्वारा प्रतिबंधित गतिविधियां वैध हो गई हैं। स्वैच्छिक सेक्स वर्क और शोषण/तस्करी के बीच कानून स्पष्ट अंतर करता है।
👩👧 बच्चों के अधिकारों पर भी जोर
अदालत ने यह भी कहा कि किसी बच्चे को केवल उसकी मां के पेशे के आधार पर उससे अलग नहीं किया जाना चाहिए। सेक्स वर्कर्स और उनके बच्चों की मानवीय गरिमा और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
📌 सुप्रीम कोर्ट का संदेश साफ
“पेशा कोई भी हो, व्यक्ति की गरिमा और कानून के समान संरक्षण का अधिकार समाप्त नहीं होता।”
यह फैसला Budhadev Karmaskar v. State of West Bengal मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण निर्देशों से संबंधित है।
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