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सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम को अपनाने से ही समाज की वास्तविक सुधार ज़रूरी है जमीयत उलमा-ए-हिंद।

सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम को अपनाने से ही समाज की वास्तविक सुधार ज़रूरी है जमीयत उलमा-ए-हिंद।                             

विशेष रिपोर्ट- मो कलीम अंसारी
सहारनपुर इस्लाह-ए-मुआशरा शहर सहारनपुर के ज़ेरे-एहतिमाम रज़िया मस्जिद मानक मऊ, सहारनपुर में सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम के उनवान से एक अज़ीमुश्शान और रूहपरवर प्रोग्राम का इनइक़ाद किया गया। उलमा, अइम्मा, ज़िम्मेदारान और बड़ी तादाद में अवाम ने शिरकत की। प्रोग्राम का मक़सद सीरते तय्यिबा सल्लालाहु अलैहि वसल्लम की रोशनी में समाज की इस्लाह, अख़लाक़ी क़दरों को फ़रोग़ देना और मुसलमानों को नबी करीम सल्लालाहु अलैहि वसल्लम की मुबारक ज़िंदगी को अमली नमूना बनाने की तरग़ीब देना था।
प्रोग्राम की सदारत क़ारी फ़ुरक़ान, उस्ताद अल-मअहद इस्लामी मानक मऊ ने की, जबकि जलसे को हाफ़िज़ मुहम्मद शमशाद मानक मऊ की सरपरस्ती हासिल रही।
निज़ामत के फ़राइज़ मौलाना मुहम्मद हारिस ने अंजाम दिए। प्रोग्राम का बाक़ायदा आग़ाज़ क़ारी मुहम्मद अम्मार साहब की तिलावते क़ुरआन व नात से हुआ। प्रोग्राम के मेहमाने-ख़ुसूसी हज़रतुलहाज मौलाना मुहम्मद इनामुल्लाह क़ासमी साहब ने सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम के मौज़ू पर निहायत मोअस्सिर, फ़िक्रअंगेज़ और पुरजोश ख़िताब फ़रमाया। हज़रत ने फ़रमाया कि अगर हम हक़ीक़ी मअनी में अपने समाज की इस्लाह चाहते हैं तो हमें सीरते रसूलुल्लाह सल्लालाहु अलैहि वसल्लम को अपनी ज़िंदगी का अमली नमूना बनाना होगा। महज़ सीरत के वाक़िआत सुन लेना काफ़ी नहीं, बल्कि नबी करीम सल्लालाहु अलैहि वसल्लम के अख़लाक़ मामलात, किरदार, अद्ल, रहम, अफ़्व व दरगुज़र और हुस्ने-मुआशरत को अपनी अमली ज़िंदगी में इख़्तियार करना ज़रूरी है। हज़रत मौलाना मुहम्मद इनामुल्लाह क़ासमी साहब ने मुआशरती इस्लाह के हवाले से निहायत अहम बात बयान करते हुए फ़रमाया कि इंसान को दूसरों की अच्छाइयों को देखना चाहिए और अपनी बुराइयों पर नज़र रखनी चाहिए। अगर इंसान दूसरों की बुराइयों को तलाश करने और अपनी अच्छाइयों को देखने में लग जाए तो समाज में इस्लाह के बजाय बिगाड़ पैदा होता है। इसके बरअक्स अगर हर शख़्स अपनी इस्लाह की फ़िक्र करे, अपनी ख़ामियों को दूर करे और दूसरों की ख़ूबियों को देखे तो समाज में मुहब्बत, उख़ुव्वत, हमदर्दी और ख़ैरख़्वाही को फ़रोग़ हासिल होगा। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि नबी करीम सल्लालाहु अलैहि वसल्लम की सीरते मुबारका हमारे लिए ज़िंदगी के हर शोबे में कामिल रहनुमाई फ़राहम करती है। घरेलू ज़िंदगी हो, मुआशरती मामलात हों, पड़ोसियों के हुक़ूक़ हों, वालिदैन के साथ हुस्ने-सुलूक हो या आम मुसलमानों के साथ बरताव, हर मैदान में सीरते तय्यिबा। सल्लालाहु अलैहि वसल्लम हमारे लिए बेहतरीन नमूना है।
इस मौक़े पर हज़रत मौलाना अतहर हक़ानी साहब, सदर जमीयत उलमा-ए-हिंद शहर सहारनपुर ने भी सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम के हवाले से निहायत अहम और मुफ़ीद नसीहतें बयान फ़रमाईं। उन्होंने मुसलमानों को नबी करीम सल्लालाहु अलैहि वसल्लम की तालीमात पर अमल करने, बाहमी इत्तिहाद व इत्तिफ़ाक़ क़ायम रखने, अख़लाक़ व किरदार को बेहतर बनाने और समाज में दीनी व इस्लाही माहौल पैदा करने की तलक़ीन की उम्मीद है कि इस प्रोग्राम में होने वाली यह गुफ़्तगू महज़ गुफ़्तगू तक महदूद नहीं रहेगी बल्कि इसके अमली असरात भी सामने आएँगे और जमीयत के तमाम ज़िम्मेदारान व कारकुनान बाहमी तआवुन के साथ इस्लाहे-मुआशरा के क़याम व इस्तहकाम के लिए मज़ीद मोअस्सिर अंदाज़ में काम करेंगे। प्रोग्राम के इख़्तिताम पर हज़रत मौलाना मुहम्मद इनामुल्लाह साहब ने ख़ुसूसी दुआ फ़रमाई। उन्होंने उम्मते-मुस्लिमा, मुल्क व मिल्लत, समाज की इस्लाह, अम्न व सलामती और तमाम हाज़िरीन के लिए दुआएँ कीं, जिसके बाद यह बाबरकत प्रोग्राम इख़्तिताम-पज़ीर हुआ। इस प्रोग्राम की कामयाबी में रज़िया मस्जिद के इमाम व ख़तीब क़ारी मोहसिन साहब और मुसल्लियान (अहले-महल्ला) की मेहनत, दावत, इख़्लास और मुसलसल जद्दोजहद का अहम किरदार रहा। उनकी दावत व लगन के नतीजे में प्रोग्राम निहायत नज़्म व ज़ब्त और कामयाबी के साथ मुनअक़िद हुआ। उलमा-ए-किराम और शुरका ने उनकी ख़िदमात को सराहा और दुआ की कि अल्लाह ताला उनकी तमाम मेहनतों को शरफ़े-क़ुबूलियत अता फ़रमाए और उन्हें दीन की ख़िदमत के लिए मज़ीद इख़्लास व इस्तिक़ामत नसीब फ़रमाए। प्रोग्राम में मौलाना हारिस, क़ारी इस्लाम साहब, मौलाना, मौलवी जुनैद साहब, मौलाना अब्दुल हसीब साहब, मौलाना अब्दुल अलीम इमाम व ख़तीब मदीना मस्जिद लिंक रोड, मौलाना फ़ुरक़ान साहब, रज़िया मस्जिद के मुतवल्ली भाई मुहम्मद नौशाद साहब, नायब मुतवल्ली मुहम्मद अमजद साहब, नूर बस्ती से भाई तस्लीम, भाई अलीशान समेत शहर व अतराफ़ के मुतअद्दिद उलमा, अइम्मा, ज़िम्मेदारान और मुअज़्ज़िज़ीन ने शिरकत की।
शुरका ने इस बात का इज़हार किया कि मौजूदा दौर में मुआशरती बुराइयों के ख़ातमे और नई नस्ल की दीनी व अख़लाक़ी तरबियत के लिए ऐसे इस्लाही और सीरतुन्नबी सल्लालाहु अलैहि वसल्लम पर मबनी प्रोग्रामों की सख़्त ज़रूरत है। अगर मुसलमान नबी करीम सल्लालाहु अलैहि वसल्लम की सीरते तय्यिबा को अपनी ज़िंदगियों में नाफ़िज़ कर लें तो समाज में पाई जाने वाली बहुत-सी बुराइयों का अज़ाला मुमकिन है प्रोग्राम के इख़्तिताम पर मुनज़्ज़िमीन की जानिब से तमाम उलमा-ए-किराम, मेहमानाने-गिरामी और शुरका का शुक्रिया अदा किया गया और आइंदा भी इस्लाहे-मुआशरा के लिए ऐसे दीनी व इस्लाही प्रोग्राम जारी रखने के अज़्म का इज़हार किया गया। बक़लम मुहम्मद जुनैद मज़ाहिरी इमाम नई उम्र मस्जिद, रायवाला, सहारनपुर

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