बड़े बैनामों पर डीएम की पैनी नजर, खुद मौके पर पहुंचकर की जांच

बड़े बैनामों पर डीएम की पैनी नजर, खुद मौके पर पहुंचकर की जांच
पांच बड़े बैनामों की मौके पर जांच, स्टांप शुल्क, सर्किल रेट और बाजार मूल्य का कराया मिलान
ब्यूरो रिपोर्टर- तुषार शुक्ला
लखीमपुर खीरी, 22 अगस्त। जिले में बड़े मूल्य की संपत्तियों के बैनामों पर प्रशासन की निगरानी अब और सख्त हो गई है। राजस्व हितों की सुरक्षा को लेकर डीएम अंजनी कुमार सिंह ने शनिवार को खुद मौके पर पहुंचकर पांच बड़े बैनामों की जांच की। डीएम ने ब्लॉक फूलबेहड़ के ग्राम ओदरहना तथा नगर पालिका परिषद लखीमपुर क्षेत्र के मोहल्ला नई बस्ती, राजापुर और काशीनगर पहुंचकर बैनामों में दर्ज संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया। अचानक मौके पर पहुंचे डीएम के निरीक्षण से स्टांप एवं निबंधन विभाग के अधिकारियों में भी हलचल रही।
डीएम ने जांच की शुरुआत उप निबंधक कार्यालय के अभिलेखों के अवलोकन से की। इसके बाद तहसील एवं नगर पालिका परिषद लखीमपुर क्षेत्र में दर्ज पांच बड़े बैनामों से संबंधित भूमि का मौके पर निरीक्षण किया गया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से बैनामों में दर्ज भूमि का क्षेत्रफल, भूमि का स्वरूप, मौके पर मौजूद निर्माण, संपत्ति का बाजार मूल्य और उस पर लगाए गए स्टांप शुल्क की जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान अभिलेखों में दर्ज विवरण का मौके की वास्तविक स्थिति से मिलान कराया गया। नक्शे, राजस्व अभिलेख और बैनामों में दर्ज संपत्ति की स्थिति का भी बारीकी से सत्यापन किया गया। डीएम ने अधिकारियों से यह भी जानकारी ली कि संबंधित संपत्तियों का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया और निर्धारित सर्किल रेट के अनुसार स्टांप शुल्क का निर्धारण किस प्रकार हुआ।
इस दौरान सहायक महानिरीक्षक स्टांप अमिताभ कुमार तथा राजस्व विभाग की टीम मौजूद रही। डीएम ने अधिकारियों से बड़े बैनामों की जांच प्रक्रिया, सर्किल रेट और संपत्ति के मूल्यांकन से संबंधित बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट किया कि बड़े मूल्य के बैनामों में किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना को गंभीरता से लिया जाएगा।
डीएम ने सहायक महानिरीक्षक स्टांप को निर्देश दिए कि जिन बैनामों में कम मूल्यांकन, स्टांप शुल्क में कमी, संपत्ति का गलत विवरण अथवा नियमों की अनदेखी की आशंका हो, उनकी निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए। जांच में यदि स्टांप शुल्क की चोरी या राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासन के राजस्व हितों को किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ऐसे मामलों में जांच समयबद्ध तरीके से पूरी कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
डीएम के इस निरीक्षण से साफ है कि जिले में बड़े बैनामों के मूल्यांकन और स्टांप शुल्क निर्धारण को लेकर प्रशासन अब केवल कार्यालयी अभिलेखों पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर मौके पर पहुंचकर भी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति का सत्यापन कराया जाएगा।



