पल्स पोलियो अभियान: सीएमओ ने छह बूथों का किया औचक निरीक्षण, वैक्सीन की ‘कोल्ड चेन’ और तापमान को परखा

पल्स पोलियो अभियान: सीएमओ ने छह बूथों का किया औचक निरीक्षण, वैक्सीन की ‘कोल्ड चेन’ और तापमान को परखा
ब्यूरो रिपोर्टर – तुषार शुक्ला
लखीमपुर खीरी। जन्म से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने के लिए रविवार से पल्स पोलियो अभियान का शंखनाद हो गया है। अभियान के पहले दिन ‘पोलियो रविवार’ पर बूथों की जमीनी हकीकत और व्यवस्थाओं को परखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. संतोष गुप्ता ने खुद कमान संभाली। सीएमओ ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के एसएमओ डॉ. विकास सिंह के साथ जिले के छह विभिन्न पोलियो बूथों का औचक निरीक्षण किया और प्रभारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ संतोष गुप्ता ने बताया कि अभियान को पूरी पारदर्शिता और कड़ाई से लागू करने के लिए जिले में विशेष नोडल अधिकारी नामित किए गए हैं। ये नोडल अधिकारी अपने-अपने आवंटित क्षेत्रों में चल रहे पल्स पोलियो बूथों का लगातार निरीक्षण कर व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखेंगे। इसके साथ ही, डब्ल्यूएचओ की टीम के साथ स्थानीय सुपरवाइजर भी लगातार क्षेत्र में भ्रमणशील रहेंगे और धरातल पर काम कर रही पोलियो टीमों की पल-पल की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को प्रेषित करेंगे।
औचक निरीक्षण की शुरुआत करते हुए सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने सबसे पहले नगरीय (अर्बन) क्षेत्र के अंतर्गत शाहपुरा कोठी और नौरंगाबाद स्थित पोलियो बूथों का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारी द्वय ने ग्रामीण अंचलों का रुख किया, जहां उन्होंने संसारपुर, ज्ञानपुर, सैदापुर और फूलबेहड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पर संचालित पल्स पोलियो बूथों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं।
वैक्सीन की गुणवत्ता और कोल्ड चेन पर रहा विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने बूथों पर रखी पोलियो वैक्सीन की गुणवत्ता की बारीकी से जांच की। उन्होंने वैक्सीन की प्रभावशीलता बनाए रखने के लिए कोल्ड चेन (शीत श्रृंखला) से संबंधित जानकारी हासिल की। वैक्सीन और उन्हें रखने वाले कैरियर बॉक्स को देखते हुए उन्होंने जिम्मेदार कर्मचारियों को हर हाल में सही तापमान (टेंपरेचर) मेंटेन रखने के सख्त निर्देश दिए, ताकि वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित और असरदार रहे।
‘एक भी बच्चा छूटना नहीं चाहिए’, घर-घर जाने के निर्देश
सीएमओ ने बूथों पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों, एएनएम और आशा बहुओं से संवाद करते हुए कहा कि क्षेत्र के लक्षित बच्चों को बूथों तक लाने के लिए परिवारों से लगातार संपर्क साधा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि:
अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एएनएम स्थानीय स्तर पर मुस्तैदी से काम करें।
आशा कार्यकर्ता गांव के हर एक परिवार को जागरूक कर बच्चों को बूथ तक लाएं। बूथ दिवस के बाद ‘एक भी बच्चा छूटने न पाए’ के संकल्प के साथ टीम गांव-गांव और घर-घर जाकर दस्तक दे। इस दौरान डब्ल्यूएचओ के एसएमओ डॉ. विकास सिंह ने भी बूथों पर तैनात टीमों को तकनीकी बारीकियों और माइक्रोप्लान के अनुसार शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के गुर सिखाए। अधिकारियों और सुपरवाइजरों की इस सक्रियता से पहले दिन अभियान सुचारू रूप से चलता नजर आया।



