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भाषा में नवाचार के साथ प्रमाणिक शोध भी जरूरी : कुलपति माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय

भाषा में नवाचार के साथ प्रमाणिक शोध भी जरूरी : कुलपति माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय

विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी

सहारनपुर माँ शाकुम्भरी विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस के अवसर पर हिन्दी वर्णमाला, वर्तनी एवं तकनीकी शब्दावली क्विज, पोस्टर प्रतियोगिता, नुक्कड़ नाटक एवं कविता वाचन सहित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी भाषा के प्रति विद्यार्थियों में रुचि एवं सम्मान की भावना विकसित करने के साथ-साथ भाषा के व्यावहारिक, रचनात्मक एवं तकनीकी पक्ष को प्रोत्साहित करना रहा।
हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रमों ने न केवल हिन्दी भाषा के महत्व को समझने का अवसर प्रदान किया, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों एवं भाषायी विरासत से जुड़ने का भी अवसर दिया। वक्ताओं ने कहा कि हिन्दी आज केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि ज्ञान, विज्ञान, साहित्य, संस्कृति एवं शोध की एक महत्वपूर्ण भाषा है। नई पीढ़ी तक हिन्दी की समृद्ध विरासत को प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए भाषा के संरक्षण के साथ-साथ उसमें निरंतर नवाचार और परिमार्जन आवश्यक है।
कार्यक्रम के दौरान छात्र कर्णपाल ने अपनी गायन प्रस्तुति के माध्यम से हिन्दी भाषा के महत्व को संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने हिन्दी को अपनी मातृभाषा बताते हुए इसे हिन्दुस्तान की शान के रूप में अभिव्यक्त किया। इस अवसर पर  कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय में शासकीय कार्यों में हिन्दी का महत्वपूर्ण स्थान है। हिन्दी दिवस केवल संवाद की भाषा के रूप में हिन्दी के महत्व को रेखांकित करने का अवसर नहीं, बल्कि भाषा के माध्यम से भावनाओं, विचारों और संस्कृति को अभिव्यक्त करने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि हिन्दी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए भाषा को सहज, प्रभावी, परिष्कृत एवं व्यावहारिक रूप में अपनाना आवश्यक है। हिन्दी भाषा के शुद्ध एवं सार्थक प्रयोग के साथ-साथ उसमें नवीन तकनीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वय की दिशा में भी कार्य किया जाना चाहिए।*
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भाषा के विकास के लिए केवल संरक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि भाषा में नवाचार, प्रमाणिक शोध और तकनीकी समन्वय भी आवश्यक है। हिन्दी को ज्ञान-विज्ञान एवं शोध की भाषा के रूप में और अधिक सशक्त बनाने के लिए विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को गुणवत्तापूर्ण एवं मौलिक शोध के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। हिन्दी वर्णमाला, वर्तनी एवं तकनीकी शब्दावली क्विज ने विद्यार्थियों के भाषायी ज्ञान को परखा, वहीं पोस्टर प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों ने रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की। नुक्कड़ नाटक एवं कविता वाचन के माध्यम से हिन्दी भाषा के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं भावनात्मक पक्ष को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
पोस्टर प्रतियोगिता में शबा नाज़ ने  प्रथम, आरती ने द्वितीय एवं मोहम्मद नदीम और आरजू बर्मन ने तृतीय तथा हिन्दी वर्णमाला, वर्तनी एवं तकनीकी शब्दावली क्विज में तरंग यादव प्रथम, खुशी एवं पंकज हाटवाल ने द्वितीय तथा आंशिका कपिल, खुशनसीब परवीन एवं अमित कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। दस छात्रों की टीम ने नुक्कड़ नाटक का मंचन प्रभावशाली तरीके से किया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिन्दी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने तथा विद्यार्थियों को भाषा के रचनात्मक एवं समकालीन प्रयोग के लिए प्रेरित करना रहा।
कार्यक्रम का मंच संचालन हिन्दी विभाग की छात्रा अंशिका कपिल एवं तरंग यादव द्वारा किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की कुलपति महोदया प्रो. वाई. विमला, शैक्षणिक समन्वयक डॉ. विनोद कुमार, पुस्तकालय समन्वयक डॉ. आर. के. गुप्ता, डॉ. राजकुमार, डॉ. सुरेंद्र कुमार, डॉ. अपूर्वा, डॉ. संदीप कुमार, डॉ. फ़ौजिया परवीन, डॉ. अंकिता चौधरी, डॉ. प्रतिभा चौहान, डॉ. शशि, डॉ. रूपमाला, डॉ. आशीष आर्य, डॉ. संजय, डॉ. विजय प्रताप, कु. पूजा देवी, कु. रोशनी मोदी, श्री सुलभ सिंह, दीपांशु, वैभव, ललित, संगीत, अभियंता श्री विवेक पुंडीर सहित विश्वविद्यालय के समस्त संकाय सदस्य, शिक्षकगण, कर्मचारीगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।

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