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रातों-रात धराशायी हुआ 115 साल पुराना इतिहास: प्रशासन का ‘बुलडोजर एक्शन’ या संविधान पर चोट? उठे गंभीर सवाल

रातों-रात धराशायी हुआ 115 साल पुराना इतिहास: प्रशासन का ‘बुलडोजर एक्शन’ या संविधान पर चोट? उठे गंभीर सवाल

विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी

सहारनपुर देश के सबसे पुराने प्रशासनिक परिसरों में शुमार सहारनपुर कलेक्ट्रेट की दीवारें शनिवार तड़के एक ऐतिहासिक मोड़ की गवाह बनीं। सुबह 5 बजे, जब पूरा शहर गहरी नींद में सो रहा था, कलेक्ट्रेट परिसर में सन् 1911 से पहले बनी ऐतिहासिक मस्जिद को पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया। भोर की पहली किरण के साथ जब शहर वासियों की आंखें खुलीं, तो कलेक्ट्रेट में मस्जिद की जगह सिर्फ मलबे का ढेर था। इस घटना के बाद से पूरे सहारनपुर का माहौल बेहद गमगीन और तनावपूर्ण बना हुआ है।*

रात में ‘सीलिंग’ का भरोसा, तड़के ‘ध्वस्तीकरण’ का एक्शन

*घटनाक्रम की पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील रही। शुक्रवार रात जब मस्जिद को तोड़े जाने की खबरें फैलने लगीं, तो मौके पर लोगों की भारी भीड़ इकट्ठा हो गई थी।

स्थिति को भांपते हुए प्रशासनिक अधिकारियों और जिलाधिकारी (DM) ने रात में मुस्तैदी दिखाते हुए भीड़ को यह कहकर शांत कराया था कि मस्जिद को केवल ‘सील’ किया जाएगा, तोड़ा नहीं जाएगा।

इस आश्वासन पर भरोसा कर कलेक्ट्रेट से लौटी जनता को सुबह जो देखने को मिला,उसने प्रशासनिक दावों पर गहरा विश्वासघात का सवाल खड़ा कर दिया है।

मजबूत दीवारों से टकराईं JCB मशीनें

16 जुलाई को जिला प्रशासन द्वारा इस निर्माण को ‘अवैध’ घोषित किए जाने के बाद से ही विवाद गहराया हुआ था। शनिवार सुबह नगर निगम की भारी-भरकम जेसीबी मशीनें जब मौके पर पहुंचीं, तो मस्जिद का ढांचा ढहाने में प्रशासन के पसीने छूट गए। 100 साल से अधिक पुराना यह निर्माण इतना मजबूत था कि जेसीबी मशीनों को भी उसे गिराने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी।

बिजली के बिल पर अदालत का संग्राम

यह मामला सिर्फ जमीनी कार्रवाई का नहीं, बल्कि दस्तावेजों की तीखी जंग का भी रहा है।

मस्जिद कमेटी का तर्क: कोर्ट में मस्जिद कमेटी ने 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल प्रस्तुत करते हुए यह दलील दी थी कि कलेक्ट्रेट की स्थापना से पहले ही मस्जिद का अस्तित्व था

प्रशासन का दावा: इसके उलट, जिला प्रशासन ने अपने रिकॉर्ड सामने रखते हुए तर्क दिया कि पूरे सहारनपुर में पहली बार बिजली की आपूर्ति ही 1912 में शुरू हुई थी।

“यह मस्जिद नहीं, संविधान का ध्वस्तीकरण है”- इमरान मसूद

घटना के बाद पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत गर्मा गई है।

सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस दिन को सहारनपुर के इतिहास का सबसे काला दिन करार दिया।

सांसद इमरान मसूद का कड़ा बयान:

“आज का दिन सहारनपुर वासियों के लिए एक काला दिन है। कलेक्ट्रेट परिसर की इस ऐतिहासिक मस्जिद को धरती पर जमींदोज नहीं किया गया है, बल्कि यह देश के संविधान का ध्वस्तीकरण है। यह सीधे तौर पर लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादाओं को कुचलने का काम किया गया है। जब रात में जनता को सीलिंग का आश्वासन दिया गया, तो तड़के अंधेरे में यह कार्रवाई करके प्रशासन ने अपनी ही साख पर सवालिया निशान लगा लिया है।”

शहर सहारनपुर में गमगीन माहौल, अलर्ट मोड पर पुलिस

वर्तमान में पूरे सहारनपुर शहर का माहौल अत्यंत गमगीन और संवेदनशील बना हुआ है। शहर के कोने-कोने में भारी पुलिस बल और पीएसी (PAC) RRF की तैनाती कर दी गई है। कलेक्ट्रेट परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है। खुफिया एजेंसियां पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी भी तरह के जनआक्रोश या शांति-व्यवस्था भंग होने की गुंजाइश को रोका जा सके।प्रशासनिक स्तर पर इस कार्रवाई को वैधानिक बताया जा रहा है,लेकिन जिस तरह रात के अंधेरे और सुबह के सन्नाटे का सहारा लेकर इस ऐतिहासिक ढांचे को ढहाया गया, उसने शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर कई ऐसे यक्ष प्रश्न खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब देना आने वाले दिनों में आसान नहीं होगा।

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