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बाटी-चोखा भोज के बाद पूरनपुर की सियासत में हलचल, बढ़ीं राजनीतिक चर्चाएं

ब्यूरो रिपोर्ट- पूरनपुर//पीलीभीत

बाटी-चोखा भोज के बाद पूरनपुर की सियासत में हलचल, बढ़ीं राजनीतिक चर्चाएं

एक साथ जुटे प्रधान, पूर्व प्रधान और कई प्रभावशाली चेहरे; आयोजन को लेकर निकाले जा रहे सियासी मायने

पीलीभीत। जनपद पीलीभीत की 129 विधानसभा पूरनपुर क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में आयोजित बाटी-चोखा भोज के बाद क्षेत्र के राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। कार्यक्रम में विधानसभा क्षेत्र के बड़ी संख्या में वर्तमान एवं पूर्व ग्राम प्रधानों के अलावा कई जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न वर्गों से जुड़े प्रभावशाली लोग नजर आए। बड़ी संख्या में प्रमुख चेहरों की मौजूदगी के बाद अब इस आयोजन को लेकर तरह-तरह के राजनीतिक कयास लगाए जा रहे हैं।

क्या महज सामाजिक मिलन समारोह था या भविष्य की सियासी रणनीति का संकेत?

कार्यक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह महज एक सामान्य सामाजिक मिलन समारोह था या फिर आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किसी संभावित रणनीति की शुरुआती तस्वीर? हालांकि, कार्यक्रम के आयोजक की ओर से इसे पूरी तरह सामान्य मिलन समारोह बताया गया है। आयोजक के अनुसार, कार्यक्रम का उद्देश्य आपसी मेल-जोल और सामाजिक सहभागिता था। भोज के दौरान किसी राजनीतिक विषय पर कोई औपचारिक अथवा आधिकारिक चर्चा नहीं की गई।

चुनावी चर्चाओं से गर्म हुआ माहौल

हालांकि कार्यक्रम में किसी राजनीतिक मुद्दे पर औपचारिक चर्चा नहीं हुई, लेकिन वहां मौजूद लोगों के बीच अनौपचारिक बातचीत में आगामी विधानसभा चुनाव, क्षेत्रीय राजनीतिक परिस्थितियों और संभावित चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाएं होती रहीं। यही वजह है कि कार्यक्रम समाप्त होने के बाद इसके राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे हैं।

भाजपा में प्रत्याशी के चेहरे को लेकर भी चर्चाएं

इसी बीच राजनीतिक एवं सामाजिक हलकों में भारतीय जनता पार्टी के आगामी विधानसभा चुनाव के प्रत्याशी को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का मानना है कि आगामी चुनाव को देखते हुए भाजपा में प्रत्याशी के चेहरे में बदलाव होना चाहिए। हालांकि, यह स्पष्ट है कि बाटी-चोखा भोज के दौरान प्रत्याशी बदलने अथवा किसी संभावित उम्मीदवार को लेकर कोई आधिकारिक चर्चा या निर्णय नहीं हुआ। ऐसे में प्रत्याशी परिवर्तन की चर्चा को फिलहाल राजनीतिक हलकों में चल रही राय और अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

हर वर्ग की मौजूदगी ने बढ़ाई आयोजन की चर्चा

बाटी-चोखा भोज में विभिन्न सामाजिक वर्गों से जुड़े सम्मानित नागरिक, वर्तमान एवं पूर्व ग्राम प्रधान, जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े लोगों की एक साथ मौजूदगी ने कार्यक्रम को क्षेत्रीय स्तर पर खास चर्चा का विषय बना दिया। फिलहाल आयोजक इसे सामाजिक मिलन और आपसी सौहार्द का कार्यक्रम बता रहे हैं, लेकिन कार्यक्रम में जुटे प्रमुख चेहरों और उसके बाद शुरू हुई राजनीतिक चर्चाओं ने पूरनपुर की सियासत में संभावनाओं और नए समीकरणों को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है। अब सवाल यही है कि यह आयोजन महज एक सामाजिक मिलन समारोह बनकर रह जाएगा या आने वाले दिनों में पूरनपुर की राजनीति में किसी बड़े बदलाव अथवा नए राजनीतिक समीकरण की भूमिका तैयार करेगा? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।

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