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कमीशनखोरी की आड़ में फल-फूल रहा फर्जी अस्पतालों का कारोबार?

रिपोर्ट- ठाकुर विकास सिंह, पीलीभीत

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कमीशनखोरी की आड़ में फल-फूल रहा फर्जी अस्पतालों का कारोबार?

समाजसेवी की सोशल मीडिया पोस्ट से मचा हड़कंप, स्वास्थ्य विभाग से व्यापक जांच की मांग

पूरनपुर (पीलीभीत)। पूरनपुर और सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र में संचालित निजी अस्पतालों, हेल्थ केयर सेंटरों, पैथोलॉजी लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटरों की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, संस्थानों के पंजीकरण, चिकित्सकों की योग्यता और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग से व्यापक सत्यापन अभियान चलाने की मांग की है।मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब समाजसेवी रवि यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर एक पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया कि कथित कमीशनखोरी के चलते क्षेत्र में फर्जी अस्पतालों, फर्जी अल्ट्रासाउंड सेंटरों, अवैध पैथोलॉजी लैब और हेल्थ केयर सेंटरों का संचालन धड़ल्ले से हो रहा है। उनकी पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस शुरू हो गई।

रवि यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, “कमीशन के दम पर पूरनपुर में फर्जी अल्ट्रासाउंड, फर्जी लैब और फर्जी अस्पतालों का कारोबार फैलता जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारी सब कुछ जानते हुए भी अनजान बने हुए हैं। जनता की सेहत से खिलवाड़ बंद किया जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई हो।” इस पोस्ट के बाद क्षेत्र के कई लोगों ने भी स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग उठाई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पूरनपुर तथा सेहरामऊ उत्तरी क्षेत्र के अनेक गांवों में निजी अस्पताल, क्लीनिक और हेल्थ केयर सेंटर संचालित हो रहे हैं। उनका मानना है कि सभी संस्थानों के लाइसेंस, पंजीकरण, चिकित्सकों की डिग्री, तकनीकी स्टाफ की योग्यता और स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित मानकों का निष्पक्ष सत्यापन कराया जाना चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि नियमित निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई हो, तो अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर रोक लगाई जा सकती है और मरीजों को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी। इस बीच, हाल ही में पूरनपुर के एक निजी अस्पताल में नवजात की मौत के बाद इलाज में लापरवाही और कथित अवैध वसूली के आरोप भी चर्चा में रहे। हालांकि, बाद में शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत वापस ले ली और आगे कार्रवाई से इनकार कर दिया। इसके उपरांत स्वास्थ्य विभाग की जांच में संबंधित अस्पताल को राहत मिल गई। बावजूद इसके, इस घटना ने निजी स्वास्थ्य संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए।

वहीं, सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के पटिहन गांव स्थित एक हेल्थ केयर सेंटर की वैधता और संचालन संबंधी मानकों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच आवश्यक मानी जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि पटिहन, कुर्रेया, जोगराजपुर, पिपरा, मुरादपुर, सुल्तानपुर सहित आसपास के कई गांवों में संचालित निजी क्लीनिकों और हेल्थ केयर सेंटरों की भी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ संस्थानों में मरीजों से इलाज, जांच और दवाओं के नाम पर मनमाना शुल्क वसूला जाता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है।लोगों ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि पूरे क्षेत्र में विशेष अभियान चलाकर सभी निजी अस्पतालों, क्लीनिकों, हेल्थ केयर सेंटरों, पैथोलॉजी लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटरों का सत्यापन कराया जाए। जिन संस्थानों के पास वैध पंजीकरण, आवश्यक लाइसेंस, प्रशिक्षित चिकित्सक अथवा निर्धारित मानकों का पालन नहीं पाया जाए, उनके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित आरोप संबंधित व्यक्तियों एवं स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए हैं। SvasJsNews इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। संबंधित स्वास्थ्य विभाग अथवा जिन संस्थानों का नाम या संदर्भ इस प्रकरण से जुड़ता है, उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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