झूठा आश्वासन देकर बंद कराई शिकायत, तीन माह बाद भी नहीं सुधरी पाइपलाइन लीकेज
हजारों लीटर पानी बर्बाद, दूषित जल आपूर्ति की आशंका; जल शक्ति मंत्रालय से जांच की मांग
🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | पीलीभीत
जल जीवन मिशन में बड़ा खेल?
शिकायतकर्ता का आरोप— झूठा आश्वासन लेकर बंद कर दी शिकायत, तीन माह बाद भी नहीं सुधरी पाइपलाइन लीकेज
कागजों में समाधान, धरातल पर समस्या बरकरार!
दूषित पेयजल और हजारों लीटर पानी बर्बादी का आरोप, जल शक्ति मंत्रालय से निष्पक्ष जांच की मांग
पीलीभीत। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद पीलीभीत की ग्राम पंचायत जगतपुर निवासी पंकज कुमार सिंह ने जल शक्ति मंत्रालय, भारत सरकार को भेजी शिकायत में योजना के कार्यों में अनियमितताओं, पाइपलाइन लीकेज और जनसुनवाई शिकायत के कथित गलत निस्तारण का आरोप लगाया है।शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत संख्या 40015126007621 दर्ज कर गांव में जगह-जगह हो रही पाइपलाइन लीकेज, अधूरे कार्यों तथा अपने घर पर जल कनेक्शन न मिलने की समस्या उठाई थी। आरोप है कि संबंधित विभाग द्वारा रिपोर्ट में सभी समस्याओं का समाधान दिखाकर शिकायत का निस्तारण कर दिया गया, जबकि वास्तविक स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।ग्रामीण के अनुसार शिकायत के बाद कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि उनके घर पहुंचे और एक सप्ताह के भीतर सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। इसी आश्वासन के आधार पर उनसे सहमति पत्र प्राप्त कर लिया गया, लेकिन तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो पाइपलाइन लीकेज ठीक हुई और न ही उनके घर पर जल कनेक्शन दिया गया।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि गांव में कई स्थानों पर पाइपलाइन से लगातार पानी रिस रहा है, जिससे प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। साथ ही लीकेज के कारण पाइपलाइन में गंदे पानी के प्रवेश की आशंका बनी हुई है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।शिकायतकर्ता ने जल शक्ति मंत्रालय से मामले की उच्च स्तरीय जांच, केंद्र एवं राज्य स्तर की तकनीकी टीम द्वारा स्थलीय निरीक्षण, कार्यदायी संस्था के कार्यों की गुणवत्ता जांच तथा दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है।ग्रामीणों का कहना है कि यदि जमीनी स्तर पर समस्याएं बनी रहें और कागजों में समाधान दिखाकर शिकायतें बंद कर दी जाएं, तो जनकल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
अब सभी की निगाहें जल शक्ति मंत्रालय पर टिकी हैं कि इस गंभीर शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है।





