दिव्यांग प्रमाण पत्र आवेदन में देरी पर युवक ने उठाए सवाल, रेलवे प्रशासन से जांच की मांग
60% दिव्यांग युवक का आरोप: रेलवे की लापरवाही से लंबित पड़ा दिव्यांग प्रमाण पत्र आवेदन, GM से कार्रवाई की मांग
60% दिव्यांग युवक ने रेलवे प्रशासन पर लगाया लापरवाही का आरोप, महाप्रबंधक से की जांच और कार्रवाई की मांग
पीलीभीत। भारतीय रेलवे के दिव्यांगजन प्रमाण पत्र पोर्टल पर किए गए आवेदन के निस्तारण में हो रही देरी से परेशान एक 60 प्रतिशत दिव्यांग युवक ने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को शिकायत भेजकर मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
पीलीभीत निवासी पंकज ने महाप्रबंधक, पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर को भेजे गए प्रार्थना पत्र में बताया कि उन्होंने 8 मई 2026 को रेलवे दिव्यांगजन प्रमाण पत्र हेतु आवेदन संख्या 2898429 ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तुत किया था। आवेदन किए जाने के लगभग एक माह बाद भी उसका निस्तारण नहीं हुआ और आवेदन पोर्टल पर लंबित स्थिति में प्रदर्शित हो रहा है। शिकायत के अनुसार, संबंधित कार्यालय से जानकारी लेने पर बताया गया कि आवेदन सत्यापन के लिए जिला अस्पताल पीलीभीत भेज दिया गया है। हालांकि जब प्रार्थी स्वयं जिला अस्पताल पहुंचा तो वहां जांच में पता चला कि उक्त आवेदन अस्पताल को प्राप्त ही नहीं हुआ है। इससे आवेदन प्रक्रिया में गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और समन्वय की कमी उजागर होती है। पंकज कुमार सिंह का आरोप है कि जिला अस्पताल प्रशासन ने जानकारी दी कि फरवरी 2026 से अब तक रेलवे विभाग की ओर से चार सूचियां अस्पताल को भेजी जा चुकी हैं, लेकिन उन्हें प्राप्त करने अथवा आवश्यक कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए रेलवे का कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी अस्पताल नहीं पहुंचा। साथ ही उन सूचियों में उनका नाम भी शामिल नहीं किया गया। प्रार्थी का कहना है कि वह 60 प्रतिशत दिव्यांग हैं और रेलवे द्वारा दिव्यांगजनों को प्रदान की जाने वाली सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था। लेकिन अधिकारियों की उदासीनता के कारण उन्हें बार-बार कार्यालयों और अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, जिससे मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह केवल एक व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि इज्जतनगर मंडल की प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसी लापरवाही के चलते कई दिव्यांगजन अपने वैधानिक अधिकारों और रेलवे की सुविधाओं से वंचित हो सकते हैं।प्रार्थी ने महाप्रबंधक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, आवेदन संख्या 2898429 का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने, दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई करने तथा भविष्य में दिव्यांगजनों के आवेदनों के समयबद्ध निस्तारण के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था लागू करने की मांग की है।





