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माँ गोमती पदयात्रा से लखीमपुर खीरी में जनजागरण तेज, स्वच्छता और संरक्षण का सशक्त संदेश

दीपक सिंह, सह-सम्पादक

माँ गोमती पदयात्रा से लखीमपुर खीरी में जनजागरण तेज, स्वच्छता और संरक्षण का सशक्त संदेश

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लखीमपुर खीरी, दिनांक: 1 अप्रैल 2026– माँ गोमती के उद्गम स्थल माधोटांडा (जनपद पीलीभीत) से लखनऊ तक संचालित “गोमती दर्शन पदयात्रा” अब एक सशक्त जनआंदोलन के रूप में उभरती दिखाई दे रही है। इसी क्रम में आज लखीमपुर खीरी जनपद में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय कार्यक्रमों का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया, जिसमें जनसहभागिता का उत्साहपूर्ण दृश्य देखने को मिला।प्रातःकाल पदयात्रा के तहत स्वच्छता अभियान चलाया गया, जिसमें गोमती दर्शन संस्था के कार्यकर्ताओं, स्थानीय नागरिकों एवं युवाओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। माँ गोमती के तट पर सफाई करते हुए सभी ने यह संदेश दिया कि नदी की स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। इस दौरान ग्रामवासियों को जागरूक करते हुए उन्हें प्लास्टिक मुक्त वातावरण अपनाने तथा नदी की पवित्रता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके पश्चात माँ गोमती का पूजन एवं वैदिक हवन-यज्ञ कार्यक्रम अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ सम्पन्न हुआ। टेढ़े नाथ मंदिर के आचार्य जी के मार्गदर्शन में आयोजित इस यज्ञ में सामाजिक चेतना, बुद्धि-शुद्धि एवं माँ गोमती को पुनः जलपूर्ण बनाने का संकल्प लिया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने माँ गोमती को अविरल, निर्मल, बाधामुक्त एवं प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने तथा जन-जन को जागरूक करने की प्रतिज्ञा ली।

इस पावन अवसर पर मुख्य यजमान के रूप में एडवोकेट अनुराग पांडे एवं श्रीमती श्वेता सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों, समाजसेवियों एवं जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता करते हुए इस अभियान को अपना समर्थन प्रदान किया।

सायंकाल माँ गोमती तट पर “माँ गोमती का ऐतिहासिक एवं वर्तमान महत्व” विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के समरसता विभाग, अवध प्रांत के प्रमुख श्री राजकिशोर जी मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। गोष्ठी में वक्ताओं ने माँ गोमती की वर्तमान स्थिति, घटते जलस्तर, बढ़ते प्रदूषण एवं अवरोधों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में नदी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

विशिष्ट अतिथियों ने भी अपने विचार रखते हुए नदी के संरक्षण हेतु ठोस नीतियों और जनसहभागिता की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि माँ गोमती को पुनर्जीवित करने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होंगे, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

इस अवसर पर वृक्षारोपण के महत्व को भी प्रमुखता से उठाया गया। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और नदियों के संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर वृक्षारोपण आवश्यक है। वन विभाग द्वारा टेढ़े नाथ घाट पर वृक्षारोपण कर इस दिशा में एक सकारात्मक संदेश दिया गया।

यात्रा के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे ने अपने संबोधन में कहा कि माँ गोमती को अविरल और निर्मल बनाने के लिए जल प्रवाह बढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने नहरों के माध्यम से जल आपूर्ति बढ़ाने तथा नदी के प्राकृतिक स्रोतों को पुनर्जीवित करने की मांग रखी। साथ ही उन्होंने माँ गोमती को राज्य नदी का दर्जा दिलाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, युवाओं एवं महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह अभियान अब जन-जन से जुड़ता जा रहा है। विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने इस पदयात्रा को और भी प्रभावशाली बना दिया है।

अंत में माँ गोमती की भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने भावपूर्ण सहभागिता की। आरती के दौरान पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा से ओत-प्रोत हो गया।

👉 SvasJsNews अपील करता है कि प्रत्येक नागरिक इस पुनीत अभियान से जुड़कर माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और जीवनदायिनी नदी प्राप्त हो सके। 🌿

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