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पंचायत-निकाय चुनाव पर संकट गहराया, OBC आयोग का कार्यकाल समाप्ति पर

सत्यनारायण सेन गुरला- भीलवाड़ा//राजस्थान

पंचायत-निकाय चुनाव पर संकट गहराया, OBC आयोग का कार्यकाल समाप्ति पर

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राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव को लेकर स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है। सियासी दांव-पेच और प्रशासनिक देरी के बीच अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित 15 अप्रैल 2026 की डेडलाइन टूट जाएगी। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा कारण राज्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट का लंबित रहना और उसका कार्यकाल समाप्ति की ओर होना है। मई 2025 में गठित OBC आयोग का कार्यकाल 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है, जबकि आयोग को अभी तक करीब 400 पंचायतों का आवश्यक डेटा प्राप्त नहीं हो सका है। आंकड़ों में विसंगतियों और अधूरी जानकारी के चलते आयोग ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने में असमर्थता जताई है। ऐसे में बिना OBC आरक्षण के निर्धारण के चुनाव प्रक्रिया अधूरी मानी जा रही है।


इधर, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 15 अप्रैल तक चुनाव संपन्न कराने के निर्देश दिए थे, लेकिन वर्तमान हालात को देखते हुए इस समयसीमा का पालन करना लगभग असंभव प्रतीत हो रहा है। इसी को लेकर कोर्ट में अवमानना याचिका भी दायर की गई है, जिससे सरकार की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर, राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि OBC आरक्षण पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों के आधार पर इन सीटों को सामान्य श्रेणी मानकर चुनाव कराए जा सकते हैं। हालांकि, इस विकल्प को लेकर भी राजनीतिक हलकों में तीखी बहस छिड़ी हुई है। विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया है कि वह चुनावी हार के डर से जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा कर रही है और आयोग को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से अभी तक आयोग के कार्यकाल बढ़ाने पर कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। कुल मिलाकर, प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक खींचतान के चलते लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित होती नजर आ रही है, जिससे प्रदेश में चुनाव को लेकर अनिश्चितता और गहराती जा रही है।

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