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राजनगर–ऊनड़ी में अष्टान्हिका महोत्सव की भव्यता, श्रद्धा और उल्लास से गूंजा क्षेत्र

राजनगर–ऊनड़ी में अष्टान्हिका महोत्सव की भव्यता, श्रद्धा और उल्लास से गूंजा क्षेत्र

राजस्थान ब्यूरो समरथाराम सुंदेशा की विशेष खबर

जालौर– सायला उपखंड क्षेत्र के राजनगर–ऊनड़ी में आयोजित अष्टान्हिका महोत्सव इन दिनों धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक ऊर्जा और सामुदायिक सहभागिता का अद्भुत उदाहरण बनकर उभर रहा है। महोत्सव के तीसरे दिन प्रातःकाल नवकारसी के लाभार्थियों का पारंपरिक वग्गोड़ा निकाला गया। श्रद्धालु पारंपरिक वेशभूषा में सज-धजकर शामिल हुए और जयघोषों के बीच नगर की गलियों में भक्ति का वातावरण निर्मित हुआ। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की सक्रिय भागीदारी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की।

रात्रि कार्यक्रम में सुप्रसिद्ध संगीतकार, प्रतिष्ठा विशेषज्ञ एवं जीवदया प्रेमी दीपक करनपुरिया ने अपनी ओजस्वी भक्ति प्रस्तुतियों से समूचे पांडाल को भक्तिमय बना दिया। भजनों और स्तुतियों के माध्यम से उन्होंने धर्म, सेवा और करुणा का संदेश दिया, जिसे उपस्थित श्रद्धालुओं ने भाव-विभोर होकर सुना। इसके साथ ही जादूगर गोपाल भाई ने आकर्षक जादुई प्रस्तुतियाँ देकर माहौल में उत्साह का रंग घोल दिया। बच्चों में विशेष उत्सुकता देखने को मिली और पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

महोत्सव के चौथे दिन प्रातः भगवान सुमतिनाथ के लाभार्थी परिवार द्वारा माता–पिता स्वरूप धारण कर राजा–महाराजा की भव्य झांकी सजाई गई। पारंपरिक रथ-गाड़ियों, सुसज्जित घोड़ों, गाजे-बाजे, पंजाबी ढोल और थाली की मंगल ध्वनि के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पांडाल स्थल पहुँची, जहाँ श्रद्धालुओं ने अनुशासित रूप से आसन ग्रहण कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया।

पूरे आयोजन गुरु विजय रत्नाकर सूरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में सम्पन्न हुए, जिनके प्रेरणादायी संदेशों ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन की दिशा दी। अष्टान्हिका महोत्सव ने राजनगर–ऊनड़ी को मानो आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर कर दिया।

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