भक्ति, संस्कृति और संगठन का सशक्त संगम: विश्वकर्मा जयंती पर जागरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम व नई कार्यकारिणी का गठन

भक्ति, संस्कृति और संगठन का सशक्त संगम: विश्वकर्मा जयंती पर जागरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम व नई कार्यकारिणी का गठन
भीलवाड़ा।— नरेंद्र कुमार रेगर-भगवान श्री विश्वकर्मा जयंती के पावन अवसर पर पांचाल लोहार समाज द्वारा शहर स्थित छात्रावास परिसर में दो दिवसीय धार्मिक, सांस्कृतिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन श्रद्धा, अनुशासन और उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं, महिलाओं एवं बच्चों की बड़ी संख्या में सहभागिता रही, जिससे पूरा परिसर भक्ति और उल्लास से ओतप्रोत नजर आया।
कार्यक्रमों की शुरुआत 30 जनवरी की रात्रि को आयोजित भव्य जागरण से हुई। जागरण में प्रसिद्ध भजन कलाकारों ने भगवान श्री विश्वकर्मा की महिमा का भावपूर्ण गुणगान किया। एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति पर श्रद्धालु झूमते नजर आए और पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। भजन-कीर्तन का क्रम देर रात्रि से प्रातः 4 बजे तक अनवरत चलता रहा। इस अवसर पर कार्यक्रम स्थल को आकर्षक विद्युत सज्जा एवं पुष्पों से सुसज्जित किया गया, जिसने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

31 जनवरी को दिन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों ने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं देशभक्ति गीतों पर मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास को देखकर उपस्थित समाजजनों ने तालियों की गूंज के साथ उनका उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के पश्चात सभी प्रतिभागी बच्चों को पारितोषिक देकर सम्मानित किया गया।
इसी अवसर पर समाज के पूर्व पदाधिकारियों का स्वागत एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। वक्ताओं ने उनके द्वारा समाज के विकास, एकता और संगठनात्मक मजबूती के लिए किए गए कार्यों की मुक्तकंठ से सराहना की। इसके उपरांत समाज की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया, जिसे उपस्थित समाजजनों ने सर्वसम्मति से स्वीकार करते हुए संगठन को और अधिक सशक्त व सक्रिय बनाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के समापन पर सामूहिक प्रसाद एवं भोजन व्यवस्था की गई। दोनों दिनों तक चले इस आयोजन में बड़ी संख्या में समाजजन एवं श्रद्धालु शामिल हुए। अंत में भगवान श्री विश्वकर्मा की विधिवत पूजा-अर्चना कर समाज, नगर और देश की सुख-समृद्धि की कामना की गई। आयोजन को सफल बनाने में समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं और कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।
— नरेंद्र कुमार रेगर
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