डीएम ने संभाली क्लास, बोले- रटने से नहीं, समझने से खुलेगा सफलता का रास्ता

डीएम ने संभाली क्लास, बोले- रटने से नहीं, समझने से खुलेगा सफलता का रास्ता
डिजिटल बोर्ड पर समझाया न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, साइकिल के पहिए के घर्षण पर सवाल पूछकर परखी छात्राओं की समझ
ब्यूरो रिपोर्टर -तुषार शुक्ला
लखीमपुर खीरी, 21 अगस्त।सनातन धर्म सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में शुक्रवार को छात्राओं के लिए पढ़ाई का अंदाज कुछ अलग रहा। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह शिक्षक की भूमिका में नजर आए और उन्होंने कक्षा 12 की छात्राओं को भौतिक विज्ञान पढ़ाया। डिजिटल बोर्ड के माध्यम से न्यूटन के सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियम को समझाने के साथ ही सवाल-जवाब के जरिए छात्राओं की समझ भी परखी।
डीएम ने छात्राओं को सीखने का नया तरीका बताते हुए कहा कि रटने के बजाय विषय को समझें, सवाल पूछें और सीखी हुई बात को अपने आसपास की घटनाओं से जोड़कर देखें। उन्होंने कहा कि किसी विषय को याद कर लेना आसान है, लेकिन उसके पीछे का तर्क समझना ही वास्तविक ज्ञान है।
उन्होंने कहा कि जेईई, नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में केवल याददाश्त के आधार पर सफलता हासिल नहीं की जा सकती। इसके लिए विषय के कॉन्सेप्ट की गहरी समझ, निरंतर अभ्यास और समस्याओं को तार्किक तरीके से हल करने की क्षमता जरूरी है। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों से आज जानकारी आसानी से उपलब्ध है, लेकिन महत्वपूर्ण यह है कि विद्यार्थी उस जानकारी को कितना समझता और व्यवहार में उसका प्रयोग कर पाता है।
साइकिल के पहिए ने उलझाया सवाल
भौतिक विज्ञान को रोचक बनाते हुए डीएम ने छात्राओं से सवाल किया कि साइकिल चलाते समय पहिए पर घर्षण बल किस दिशा में लगता है और क्यों? सवाल सुनकर छात्राओं ने अपने-अपने जवाब दिए। डीएम ने उनसे पूछा कि क्या सभी के उत्तर एक जैसे हैं। इसके बाद उन्होंने शिक्षकों से भी अपना मत रखने को कहा।
डीएम ने समझाया कि ऐसे सवालों का उद्देश्य केवल सही उत्तर तक पहुंचना नहीं, बल्कि उत्तर के पीछे छिपे वैज्ञानिक तर्क को समझना है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि हर विषय को रटने के बजाय उसके पीछे छिपे ‘क्यों’ को तलाशने की आदत डालें।
ज्ञान को भी करते रहें ‘रिफ्रेश’
डीएम ने शिक्षकों से कहा कि कक्षा में जाने से पहले शिक्षक को स्वयं विषय की तैयारी करनी चाहिए। यह नहीं सोचना चाहिए कि कोई विषय वर्षों से पढ़ा रहे हैं, इसलिए उसमें नया कुछ सीखने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि पुरानी किताब को दोबारा पढ़ने पर भी कई बार नई जानकारी और नई अंतर्दृष्टि मिलती है।
उन्होंने कहा कि ज्ञान पर भी धूल जमती है, इसलिए उसे लगातार पढ़कर, दोहराकर और नई जानकारी से अपडेट करते रहना जरूरी है। कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं होता और सीखने की प्रक्रिया जीवनभर चलती रहती है।
लक्ष्य के साथ कॉन्सेप्ट भी करें मजबूत
संवाद के दौरान छात्राओं ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की अपनी इच्छा बताई। डीएम ने कहा कि लक्ष्य तय करना सफलता की दिशा में पहला कदम है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए मजबूत कॉन्सेप्ट, नियमित अभ्यास और सीखने की ललक जरूरी है।
उन्होंने छात्राओं को गलतियों से न घबराने और सवाल पूछने में संकोच न करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना समझ की पहली सीढ़ी है। रटकर अंक हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन समझकर ही वास्तविक ज्ञान प्राप्त होता है।
इनकी रही मौजूदगी
इस अवसर पर कक्षा 12 की छात्राओं के साथ विद्यालय की प्रधानाचार्य शिप्रा बाजपेई, प्रबंधक चंद्रभूषण साहनी, कोषाध्यक्ष तुषार गर्ग, सनातन धर्म सभा के सदस्य रवि भूषण साहनी, शिक्षाविद नीरज सिंह तथा भौतिक विज्ञान की शिक्षिका आराधना मिश्रा मौजूद रहीं।



