भीलवाड़ा में पंचायती राज चुनाव की सुगबुगाहटः आरक्षण लॉटरी से पहले बिछी चुनावी बिसात, ‘डमी’ चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी!

भीलवाड़ा में पंचायती राज चुनाव की सुगबुगाहटः आरक्षण लॉटरी से पहले बिछी चुनावी बिसात, ‘डमी’ चेहरों पर दांव लगाने की तैयारी!
युवाओं और पूर्व उम्मीदवारों ने शुरू की गोटियां फिट करना, सुरक्षित सीट न मिलने पर ‘प्लान-बी’ तैयार.
विशेष रिपोर्ट -सत्यनारायण सेन गुरला
गुरला/भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले के ग्रामीण अंचलों में पंचायती राज चुनावों को लेकर सियासी पारा अभी से चढ़ने लगा है। जिला परिषद, पंचायत समिति सदस्यों और ग्राम पंचायतों में सरपंच पद के लिए दावेदारों ने अपनी-अपनी गोटियां फिट करना शुरू कर दिया है। चाय की थड़ियों से लेकर गांवों की चौपालों तक चुनावी गुणा-भाग का दौर तेजी से चल रहा है। इस बार खास बात यह है कि चुनावी मैदान में उतरने को बेताब युवाओं के जोश और पुराने अनुभवी दिग्गजों के बीच अभी से कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है।
आरक्षण सर्वे और लॉटरी पर टिकी निगाहें
फिलहाल भीलवाड़ा के संभावित उम्मीदवारों की धड़कनें आगामी आरक्षण सर्वे और सीटों की लॉटरी प्रक्रिया पर टिकी हैं। चूंकि अभी तक यह साफ नहीं है कि कौन सी सीट किस वर्ग (एससी, एसटी, ओबीसी, महिला या सामान्य) के लिए आरक्षित होगी, इसलिए हर कोई असमंजस में है। इसके बावजूद, नेताओं ने हाथ पर हाथ धरे बैठने के बजाय अपने-अपने स्तर पर फील्डिंग सजाना शुरू कर दिया है।
स्वयं की सीट फंसी, तो ‘थोपे हुए’ उम्मीदवार से चलाएंगे काम
ग्रामीण राजनीति के इस दिलचस्प खेल में इस बार पूर्व उम्मीदवार और बड़े नेता कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, यदि आरक्षण की लॉटरी में किसी नेता की मनपसंद सीट उनके वर्ग से बाहर हो जाती है, तो उन्होंने बैकअप प्लान यानी ‘प्लान-बी’ तैयार कर लिया है। ऐसी स्थिति में नेता खुद सीधे चुनाव लड़ने के बजाय अपने किसी वफादार, डमी या ‘थोपे हुए उम्मीदवार’ को आगे कर खुद पर्दे के पीछे से किंगमेकर की भूमिका निभाएंगे।
शतरंज की चाल किस करवट बैठेगी?
जिले की विभिन्न पंचायत समितियों और जिला परिषद वार्डों में जोड़-तोड़ की यह राजनीति इस बार बेहद रोचक मोड़ पर है। एक तरफ जहां जमीनी स्तर पर सक्रिय युवा इस बार बदलाव के मूड में हैं, वहीं पुराने क्षत्रप अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए हर मुमकिन शतरंज की चाल चल रहे हैं। अब देखना यह है कि आरक्षण का ऊँट किस करवट बैठता है और नेताओं की यह चुनावी गणित भीलवाड़ा की ग्रामीण जनता के बीच कितनी कारगर साबित होती है। यह तो आने वाला वक्त और लॉटरी की घोषणा के बाद ही साफ हो पाएगा।



