उधोग व्यापार प्रतिनिधि मंडल द्वारा कावड़िया लगाया गया मेडिकल शिविर में….

उधोग व्यापार प्रतिनिधि मंडल द्वारा कावड़िया लगाया गया मेडिकल शिविर में….
डॉ संजीव मिगलानी और नैना मिगलानी ने कावड़ियों की स्वास्थ्य की जांच के साथ कावड़ियों को जलपान कराया…
कांवड़ियों के स्वास्थ्य को लेकर डॉ. संजीव मिगलानी ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव…
चिकित्सा शिविरों में प्राथमिक उपचार के साथ कांवड़ियों को मिल रही स्वास्थ्य संबंधी सलाह…
विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी
सहारनपुर कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. संजीव मिगलानी ने कांवड़ियों के साथ-साथ चिकित्सा शिविर संचालकों के लिए महत्वपूर्ण सुझाव जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी की पैदल यात्रा के दौरान शरीर में पानी, नमक और ऊर्जा की कमी होने से चक्कर, कमजोरी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। ऐसे में कांवड़ियों को समय-समय पर पर्याप्त तरल पदार्थ और ऊर्जा देने वाले फल लेते रहना चाहिए। डॉ. मिगलानी ने बताया कि कांवड़ियों को रास्ते में करीब एक-एक घंटे के अंतराल पर नींबू पानी, शिकंजी अथवा ORS का घोल लेते रहना चाहिए। इससे शरीर में पानी और आवश्यक इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को कम करने में मदद मिलती है और चक्कर आने की संभावना घटती है। उन्होंने कांवड़ियों को ऊर्जा बनाए रखने के लिए आम और केले जैसे फल लेते रहने की सलाह दी। उनके अनुसार, यात्रा के दौरान पर्याप्त कैलोरी और ऊर्जा लेना बेहद जरूरी है। यदि किसी कांवड़िये को चक्कर आने लगे तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर आराम करवाते हुए पैरों को थोड़ा ऊंचा रखने और तरल पदार्थ देने की सलाह दी गई है। वहीं तेज बुखार की स्थिति में शरीर को ठंडा रखने के उपाय करने तथा नजदीकी चिकित्सा शिविर में चिकित्सकीय जांच और उपचार कराने को कहा गया है। डॉ. मिगलानी ने कहा कि पैरों में जख्म या चोट लगने पर कांवड़िये इसे नजरअंदाज न करें। नजदीकी चिकित्सा शिविर में जाकर घाव की सफाई, पट्टी और चिकित्सक की सलाह के अनुसार टिटनेस से बचाव की व्यवस्था करानी चाहिए, ताकि संक्रमण का खतरा कम हो। उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि चलते समय किसी कांवड़िये को छाती में भारीपन, दर्द, सांस लेने में परेशानी या असामान्य कमजोरी महसूस हो तो तुरंत यात्रा रोककर नजदीकी चिकित्सा शिविर में चिकित्सकीय जांच एवं प्राथमिक उपचार लेना चाहिए। ब्लड प्रेशर और शुगर के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए डॉ. मिगलानी ने कहा कि ऐसे कांवड़ियों को अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डाक कांवड़ जैसे विकल्प पर विचार करना चाहिए। चलते समय अधिक पसीना आने, कमजोरी या असहज महसूस होने पर शिविर में आराम करने तथा चिकित्सकीय सलाह के अनुसार ECG और ब्लड शुगर की जांच कराने की सलाह दी गई। उन्होंने चिकित्सा शिविर संचालकों से भी अपील की कि कांवड़ियों को प्राथमिक उपचार के साथ-साथ पर्याप्त पानी, ORS और आवश्यक चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराएं, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।



