रीढ़ की हड्डी टूटी, शरीर हुआ लकवाग्रस्त… पर ओयल ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने नवल को फिर से पैरों पर खड़ा कर दिया!

रीढ़ की हड्डी टूटी, शरीर हुआ लकवाग्रस्त… पर ओयल ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने नवल को फिर से पैरों पर खड़ा कर दिया!
ब्यूरो रिपोर्टर- तुषार शुक्ला
लखीमपुर खीरी। “हौसला मत हार ऐ मुसाफिर, अभी तो जिंदगी का इम्तिहान बाकी है… जब रास्ते बंद दिखते हैं, तब कोई न कोई फरिश्ता बनकर राह आसान कर देता है।”
पेड़ से गिरने के कारण रीढ़ की हड्डी टूटने और कमर के नीचे का पूरा हिस्सा लकवाग्रस्त (पैरालिसिस) हो जाने के बाद 30 वर्षीय नवल किशोर के सामने मानो जिंदगी का अंधेरा छा गया था। बिस्तर पर लाचार हो चुके नवल के लिए अब जीवन का हर दिन एक बड़ा संकट बन चुका था। लेकिन ऐसे घोर संकट के समय में बेहजम तिराहा, ओयल स्थित 20 बेड के ट्रामा सेंटर के डॉक्टर उनके लिए साक्षात ‘भगवान’ बनकर सामने आए। डॉक्टरों की जांबाजी और अद्भुत चिकित्सकीय हुनर की बदौलत नवल किशोर की जिंदगी में एक नए और खुशनुमा सवेरे की शुरुआत हो चुकी है।
हादसे ने छीन ली थी पैरों की हरकत, थम गया था जीवन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष गुप्ता ने जानकारी देते हुए बताया कि पड़ोसी जनपद सीतापुर के हरगांव थाना क्षेत्र के ग्राम जामबौर निवासी नवल किशोर (उम्र 30 वर्ष), बीते 24 जून 2026 को एक पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से चुटहिल हो गए थे। इस भयावह हादसे में उनकी रीढ़ की हड्डी (Spine) पूरी तरह टूट गई थी, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना पूरी तरह बंद कर दिया था। इस लाचारी के बाद नवल किशोर और उनका परिवार बेहद हताश और परेशान था।
फरिश्ता बनी डॉक्टरों की टीम, घंटों की मेहनत के बाद किया सफल ऑपरेशन
हर तरफ से निराश होने के बाद, नवल किशोर को लेकर परिजन ओयल स्थित ट्रामा सेंटर पहुंचे। यहाँ तैनात विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तत्काल मरीज की गंभीर स्थिति को समझा, जांचें कीं और रीढ़ की हड्डी की बेहद जटिल व संवेदनशील मेजर सर्जरी करने का साहसिक निर्णय लिया। घंटों चली इस बेहद रिस्की सर्जरी को सफल बनाने में ट्रामा सेंटर के इन डॉक्टरों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। ऑर्थोपेडिक सर्जन्स की टीम में डॉ. हरिराम वर्मा, डॉ. विनोद, डॉ. फैजल और डॉ. शशांक,एनेस्थेटिक डॉ. जयराम शामिल थे।
दिखने लगा चमत्कार: काम करने लगा शरीर का निचला हिस्सा
डॉक्टरों की कड़ी मेहनत और सटीक इलाज का असर अब एक बड़े चमत्कार के रूप में सामने आया है। ऑपरेशन के बाद कुछ दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान नवल किशोर की रीढ़ की हड्डी में तेजी से सुधार देखा गया। राहत और बेहद खुशी की बात यह है कि लकवाग्रस्त हो चुका उनका निचला हिस्सा अब धीरे-धीरे काम करने लगा है। नवल किशोर अब तेजी से स्वस्थ हो रहे हैं और डॉक्टरों की विशेष निगरानी में उनका रूटीन चेकअप व इलाज चल रहा है।
ओयल ट्रामा सेंटर की यह ऐतिहासिक और सफल सर्जरी इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि शासन ने जिस जनकल्याणकारी मंशा के तहत लखीमपुर-सीतापुर हाईवे पर इस 20 बेड के ट्रामा सेंटर की शुरुआत की थी, वह पूरी तरह सार्थक हो रही है।
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता की मुस्तैदी और डॉक्टरों की त्वरित निर्णय क्षमता के कारण आज यह सेंटर रीढ़ की हड्डी और बड़े ऑर्थोपेडिक मामलों के लिए वरदान बन गया है। अब गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को ऐसे बड़े ऑपरेशनों के लिए लखनऊ या दिल्ली के महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं, बल्कि घर के पास ही उन्हें बिल्कुल मुफ्त इलाज मिल रहा है। नवल किशोर के परिवार ने ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों और स्वास्थ्य विभाग का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया है।



