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और अब बात उसे दर्दनाक खबर की जिसने पूरे जिले सहारनपुर को झंझो कर रख दिया, भगवान का दर्जा कहे जाने वाले बच्चों के सर्जन डॉ0 विकास तोमर ने ले ली एक नवजात शिशु की जान!!

डॉक्टर काम करके राजी नहीं प्राइवेट डॉक्टर बने धरती के भगवान नहीं धरती के यमदूत!!

सहारनपुर की इस घटना ने एक बार फिर से देशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को उजागर कर दिया है!!

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्राइवेट अस्पतालों में ऐसी घटनाएँ कोई नई बात नहीं हैं!! पर शासन से लेकर प्रशासन तक मौन धारण किए रहता है क्यों!!

डॉ विकास तोमर अपनी इस घिनौनी हरकत से परेशान होकर, न्यूबॉर्न चाइल्ड केयर के नाम से जो हॉस्पिटल है उसका लाइसेंस निरस्त करने की मांग की

सहारनपुर। मासूम नवजात… जिसने अभी ज़िंदगी की पहली साँसें ही ली थीं… लेकिन दो से तीन दिन तक इलाज के नाम पर लाखों रुपये वसूलने के बावजूद, उसकी नन्हीं साँसें थम गईं!!
जी हाँ, परिजनों का आरोप है कि सहारनपुर में थाना जनकपुरी क्षेत्र में एक निजी अस्पताल चिकित्सा विकास तोमर के यहा शिशु को आईसीयू में भर्ती कर लिया!!
रोज़ाना भारी-भरकम बिल थमाए गए!! दवा, इंजेक्शन, मशीनों के नाम पर पैसे वसूले गए… लेकिन इलाज सही नहीं किया गया!!
पूछने पर अस्पताल के स्टाफ व कम्पाउडर द्वारा बार-बार परिजनों को अपमानित किया जाता रहा!!
परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने दो से तीन दिन तक उम्मीदें जगाईं, पैसे लेते रहे, लेकिन आखिरकार जब मासूम ने दम तोड़ा तो सिर्फ़ औपचारिकता निभाई गई!!
बच्चे की मौत की ख़बर जैसे ही बाहर आई, परिजनों का ग़ुस्सा फूट पड़ा!!
अस्पताल के बाहर परिजनों ने संबंधित थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है व सीएमओ को भी घटना से अवगत करा दिया गया है!! लोग सवाल पूछ रहे हैं!!

आखिर नवजात शिशु को बचाने की कोशिश क्यों नाकाम रही डॉ0 विकास तोमर की…?

क्या मासूम की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर सिर्फ़ पैसे कमाए गए…?

और क्या स्वास्थ्य व्यवस्था अब भरोसे के काबिल भी रह गई है…?

वहीं, अस्पताल प्रबंधन अपना बचाव करता नज़र आ रहा है!! उनका कहना है कि बच्चा पहले से ही गंभीर हालत में था और डॉक्टरों ने अपनी पूरी कोशिश की!! लेकिन परिवार का दर्द और ग़ुस्सा अब शांत होने का नाम नहीं ले रहा!!
इस पूरे मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं की सच्चाई पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है!! दो से तीन दिन तक इलाज के नाम पर ठगी… और उसके बाद मासूम की मौत!!
उधर भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय संचालक अजय बिरला ने चेतावनी दी कि यदि जल्दी ही डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के कार्यकर्ता डॉक्टर के खिलाफ सड़कों पर आके धरना प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।

अपनी कमियो को छुपाने के लिये एक मासूम बच्चे की भी हत्या कर देते है इससे पहले भी ऐसी घटनाऐ इस हॉस्पिटल पहले भी हो चुकी है।

आखिर किसकी शह पर नियमो को ताख मे रख कर बेसमेंन्ट मे हॉस्पिटल चलाया जा रहा है। उपरोक्त सभी तथ्यो को घ्यान में रख कर इसकी जांच करा कर इस सम्बंध मे उचित कार्यवाही करने की कृपा करें।

फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जाँच शुरू कर दी है, लेकिन परिजनों का साफ़ कहना थाना जनकपुरी अंतर्गत चिकित्सा विकास तोमर व स्टाफ कंपाउंड पर “अब सिर्फ़ जाँच नहीं, दोषियों पर सख़्त कार्रवाई चाहिए।” देखते हैं कि अब के चिकित्सक डॉ0 विकास तोमर स्टाफ व कंपाउंड के खिलाफ कार्रवाई होती है या नही, देखना यह है कि कानून का पलड़ा किसी और बैठता है

नवजात की मौत पर परिजनों ने की चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग।

सुबे के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वास्थ विभाग पर भी एक नजर डालें।

सहारनपुर। विगत 7 सितंबर को
बाजोरिया रोड स्थित डॉ विकास तोमर के अस्पताल में नवजात की इलाज में चूक के कारण बच्चे की मौत पर परिजनों ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए चेतावनी दी यदि जल्द ही चिकित्सक के खिलाफ विभाग द्वारा कोई कार्यवाही ना की गई तो वो आंदोलन को विवश होंगे।
जीपीओ रोड स्थित एक होटल में पत्रकारों से वार्ता करते हुए मृतक नवजात के पिता मुनेश कुमार पुत्र ब्रिजपाल सिंह ने बताया कि की उनकी पत्नी ने 7 सितंबर को बच्चे को जन्म दिया था। जिसे बाजोरिया रोड स्थित डॉ विकास तोमर के अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल में नवजात की लापरवाहीपूर्ण देखभाल और इलाज में चूक के कारण बच्चे की मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि जन्म के 24 घंटे के भीतर लगने वाले टीके नहीं लगाए गए। जब मुनेश ने इस संबंध में अस्पताल कर्मचारियों से पूछा तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला और बहस की गई। शिकायत की बात उठाते ही कर्मचारियों ने दबाव बनाकर बच्चे को डिस्चार्ज करने के लिए लिखित सहमति देने को कहा। बच्चे को घर ले जाते समय उसकी तबियत बिगड़ी और उसे दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान नवजात की मृत्यु हो गई। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से चिकित्सक के खिलाफ विभागीय कार्रवाई एवं थाना जनकपुरी में एफआईआर दर्ज कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। जिसके बाद इस मामले पर सीएमओ डॉ प्रवीण कुमार ने जांच समिति गठित की थी। डॉक्टर विकास तोमर ने अपने नर्सिंग होम का लाइसेंस निरस्त करने के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है। हालांकि, अभी अस्पताल का लाइसेंस निरस्त नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सक के खिलाफ कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। जिस कारण उन्हें न्यायालय में जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा आरोपी चिकित्सक को अपना पूरा संरक्षण दिया जा रहा है, जिस कारण उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो पा रही है। उन्होंने आरोपी चिकित्सक द्वारा चलाये जा रहे अवैध अस्पताल की जांच की भी मांग की।
इस अवसर पर भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज के राष्ट्रीय संचालक अजय बिरला, भारतीय किसान यूनियन के अमर त्यागी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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