प्रथम दृष्ट्या: अव्यवस्था या अनदेखी? BCD Election 2026 पर सवाल

प्रथम दृष्ट्या: अव्यवस्था या अनदेखी? BCD Election 2026 पर सवाल
विशेष रिपोर्ट -मो. कलीम अंसारी
कानूनी भाषा में “प्रथम दृष्ट्या (Prima Facie)” का अर्थ होता है—पहली नज़र में किसी तथ्य का सही या गलत प्रतीत होना। लेकिन यह आकलन सिर्फ तथ्यों पर नहीं, बल्कि देखने वाले की दृष्टि, अधिकार और परिस्थितियों पर भी निर्भर करता है।
BCD Election 2026 इसी “प्रथम दृष्ट्या” की कसौटी पर कई सवाल खड़े करता है। मतदान के दौरान अव्यवस्था का ऐसा माहौल रहा कि करीब 5000 वोटर बिना वोट डाले लौट गए। तीन दिनों तक मतदाता मतदान के लिए भटकते रहे, लेकिन संबंधित RO टीम को इसमें कोई स्पष्ट गड़बड़ी नज़र नहीं आई।
चुनाव को “free, fair, transparent” बनाने के दावे जरूर किए गए, मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखी। पोलिंग बूथों पर कथित रूप से स्पाई चश्मे, स्पाई पेन और मोबाइल के जरिए तस्वीरें ली गईं, जो सोशल मीडिया पर वायरल भी हुईं। वोटों की खरीद-फरोख्त और बूथों के भीतर खुलेआम समर्थन मांगने जैसी घटनाएं सामने आईं, फिर भी इन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया।
मतगणना प्रक्रिया भी सवालों के घेरे में रही। 25 फरवरी को प्रस्तावित काउंटिंग 7 मार्च को शुरू हुई—करीब 12 दिन की देरी। इस अंतराल में संभावित छेड़छाड़ (tempering) की आशंका जताई गई। दूसरे राउंड में कथित गड़बड़ी पकड़ी भी गई, जिस पर BCD द्वारा FIR दर्ज कराई गई और संबंधित पक्ष को शो-कॉज नोटिस भी जारी हुआ। इसके बावजूद, प्रशासनिक स्तर पर इसे गंभीर समस्या के रूप में स्वीकार नहीं किया गया।
काउंटिंग स्थल की सुरक्षा व्यवस्था भी आलोचना के दायरे में रही। क्षेत्र खुले रहे, स्टाफ पेन के साथ मतगणना करता दिखा, जबकि आपत्ति उठाने वाले उम्मीदवारों को नोटिस और निलंबन का सामना करना पड़ा।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब काउंटिंग के दौरान वकील उम्मीदवारों के बीच तनाव बढ़ा और Rapid Action Force की तैनाती करनी पड़ी। आलोचकों का कहना है कि यह कदम व्यवस्था संभालने के बजाय विरोध को दबाने के लिए उठाया गया।
इन घटनाओं के बीच, 118 उम्मीदवारों ने एकजुट होकर चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं और पुनर्मतदान (Re-Polling) की मांग की है। मामला अब उच्च स्तरीय समितियों, उच्च न्यायालय और संभावित रूप से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचने की दिशा में बढ़ रहा है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि निर्णय “Letter” (कानूनी प्रक्रिया) के आधार पर होता है या “Spirit” (न्याय की भावना) को प्राथमिकता दी जाती है। क्योंकि अंततः यही तय करेगा कि जीत किसकी होगी—प्रभाव की या न्याय की।



