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भीषण आग में मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकान राख, चार बाइकें जलकर खाक

गेहूं की नरई जलाना पड़ा भारी: भीषण आग में मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकान राख, चार बाइकें जलकर खाक

फायर स्टेशन की दूरी बनी बड़ी मुसीबत, ग्रामीणों ने खुद संभाला मोर्चा

ब्यूरो चीफ – राहुल भारती

पूरनपुर/पीलीभीत। जनपद पीलीभीत के विकासखंड पूरनपुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुर्रेया में मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब खेत में गेहूं के अवशेष (नरई) जलाने के दौरान उठी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते आग पास स्थित मोटरसाइकिल मैकेनिक की दुकान तक पहुंच गई और पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी भीषण थी कि दुकान में खड़ी चार मोटरसाइकिलें, मरम्मत का सामान, उपकरण एवं अन्य सामग्री जलकर पूरी तरह राख हो गई। घटना में दुकान स्वामी रवि वर्मा को भारी आर्थिक नुकसान होने की बात सामने आई है। यह घटना 29 अप्रैल 2026 के दोपहर की है अगर समय की बात करें तो 12 से 2:00 बजे के बीच की बताई जा रही है।


स्थानीय लोगों के अनुसार किसान द्वारा खेत में नरई जलाई जा रही थी, तभी तेज हवा के कारण आग फैलकर दुकान तक पहुंच गई। आग की लपटें उठती देख गांव में हड़कंप मच गया। ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। बताया जा रहा है कि दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने आग बुझा दी थी। ग्रामीणों का कहना है कि पूरनपुर क्षेत्र से फायर स्टेशन की दूरी अधिक होने के कारण अक्सर ऐसी घटनाओं में राहत पहुंचने में देर हो जाती है।

🚒 फायर स्टेशन न होने से बढ़ रहा खतरा

घटना के बाद एक बार फिर क्षेत्र में फायर स्टेशन की मांग तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तहसील या थाना स्तर पर फायर स्टेशन की व्यवस्था होती, तो नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।जानकारी के अनुसार पूर्व में शासन स्तर से विकासखंड क्षेत्र की एक ग्राम पंचायत में फायर स्टेशन स्थापित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया था, लेकिन विभिन्न कारणों से वह योजना ठंडे बस्ते में चली गई। अब तक नए स्थान का चयन भी नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्रवासी लगातार जोखिम में जीवन जीने को मजबूर हैं।

⚠️ खेतों में नरई जलाना बन रहा खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार गेहूं की नरई जलाने से न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि आसपास की आबादी और संपत्ति के लिए भी बड़ा खतरा पैदा हो जाता है। प्रशासन द्वारा समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद कई किसान अब भी खुले में अवशेष जलाने से बाज नहीं आ रहे हैं।

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