विवेकानंद केंद्र ने वैदिक गार्डन में सेवा, शिक्षा और योग पर तीन स्तरीय विमर्श कार्यक्रम किया आयोजित

विवेकानंद केंद्र ने वैदिक गार्डन में सेवा, शिक्षा और योग पर तीन स्तरीय विमर्श कार्यक्रम किया आयोजित
न्यूज़ रिपोर्टर: नरेंद्र कुमार रेगर
भीलवाड़ा।
विवेकानंद केंद्र द्वारा कुमुद विहार प्रथम स्थित वैदिक गार्डन में समाज के तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों—सेवा, शिक्षा और योग—में कार्यरत व्यक्तियों के लिए अलग-अलग विमर्श कार्यक्रमों का सफल आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य समाज निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहे नागरिकों, शिक्षाविदों और योग साधकों को वैचारिक मार्गदर्शन देना तथा राष्ट्रहित में सकारात्मक सोच को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम को तीन अलग-अलग सत्रों में आयोजित किया गया। प्रथम सत्र सेवा कार्यों में संलग्न उद्योगपतियों, चिकित्सकों एवं प्रोफेशनल व्यक्तियों के लिए रहा। इस सत्र में मुख्य वक्ता पद्मश्री निवेदिता रघुनाथ भिड़े ने सेवा के दार्शनिक पक्ष पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सेवा को दो वर्गों—मूर्त और अमूर्त—में विभाजित किया जा सकता है। मूर्त सेवा भौतिक रूप से दिखाई देती है, जबकि अमूर्त सेवा भाव, संस्कार और संवेदना पर आधारित होती है। उन्होंने कहा कि अमूर्त सेवा अधिक श्रेष्ठ है, क्योंकि इससे ऐसा समाज निर्मित किया जा सकता है जहां मूर्त सेवा की आवश्यकता स्वतः समाप्त हो जाए। इस सत्र में विशिष्ट अतिथि तिलोकचंद छाबड़ा एवं दिनेश नौलखा उपस्थित रहे। केंद्र परिचय डॉ. जी. वी. दिवाकर ने दिया, संचालन सत्यम शर्मा ने किया तथा आभार बलराज आचार्य ने व्यक्त किया।

द्वितीय सत्र शिक्षा क्षेत्र से जुड़े शिक्षाविदों के लिए आयोजित किया गया, जिसमें माननीय भानुदास धाक्रस, जनजातीय प्रकल्प में कार्यरत जगदीश जोशी, पूर्वांचल क्षेत्र में शिक्षा सेवा दे रही मीरा दीदी एवं सुजाता दीदी ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने मूल्यपरक शिक्षा, माता-पिता व परिवार से विद्यार्थियों के जुड़ाव, गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा तथा असम के चाय बागान क्षेत्रों में चल रहे आनंदालय प्रकल्प की सफलता पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर भीलवाड़ा के वरिष्ठ प्रधानाचार्य एवं शिक्षा अधिकारी विजयपाल वर्मा, नरेंद्र सिंह राठौड़, विवेक सक्सेना, सुंदर सिंह चुंडावत एवं देवीलाल प्रजापत सहित अनेक शिक्षाविद उपस्थित रहे।
तृतीय सत्र योग शिक्षकों के विमर्श का रहा, जिसमें मुख्य वक्ता माननीय एम. हनुमंत राव ने योग के माध्यम से मानसिक शांति और तनाव मुक्ति पर बल दिया। उन्होंने बताया कि तनाव ही अधिकांश रोगों की जड़ है और नियमित योग अभ्यास से मन की वृत्तियों को शांत किया जा सकता है। कार्यक्रम में विभिन्न योग एवं आध्यात्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

इस अवसर पर विवेकानंद केंद्र के अखिल भारतीय एवं प्रांतीय पदाधिकारी, पूर्व सांसद, वरिष्ठ उद्योगपति तथा अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिससे आयोजन को विशेष गरिमा और व्यापक सामाजिक समर्थन प्राप्त हुआ।




