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ब्रेल लिपि एक स्पर्शी लेखन पद्धती:संजय शर्मा

ब्रेल लिपि एक स्पर्शी लेखन पद्धती:संजय शर्मा

विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी

सहारनपुर नेत्रहीनों की शिक्षण पद्धति के आविष्कारक डॉक्टर लुइस ब्रेल के जन्म दिवस 4 जनवरी ब्रेल दिवस के अवसर पर नेत्रहीन एवं विकलांग कल्याण शिक्षण संस्थान चंद्र विहार कॉलोनी गंगोह रोड पर नेत्रहीनों के द्वारा विभिन्न प्रकार के गीत संगीत, ब्रेल प्रतियोगिताएं तथा खेल प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय संस्थापक संजय शर्मा, सुषमा शर्मा, कुलदीप सिंह पुंडीर, लक्ष्मी नारायण, संजय बहल, अध्यक्ष डा अवनीश शर्मा, सुलक्षणा शर्मा, हिमांशु अरोड़ा,मोहिनी शर्मा ने लुईस ब्रेल के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। नेत्रहीन छात्रों अनुज, मनीष, शौर्य, किट्टू सैनी, आशीष सैनी, शिवम आदि ने कविताएं गीत प्रस्तुत किया। बच्चों ने ब्रेल प्रतियोगिता में भाग लिया। जिसमें पवन, शौर्य, रितेश, अनुज ने बाजी मारी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संजय शर्मा संस्थापक ने कहा कि ब्रेल लिपि एक स्पर्शी लेखन पद्धती है। इससे नेत्रहीनों को शिक्षा रोजगार और समाज में समान रूप से भाग लेने का अवसर प्रदान किया है। यह दिवस नेत्रहीनों के अधिकार के प्रति समाज को जागृत करने के लिए मनाया जाता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ने कहा इंजीनियर मोहिनी शर्मा ने कहा उद्देश्य है कि ब्रेल लिपि का व्यापक प्रसार हो और नेत्रहीन व्यक्तियों को समझ में अपनी पूर्ण क्षमता के साथ योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। कुलदीप सिंह पुंडीर ने कहायह दिन नेत्रहीनों के अधिकारों की रक्षा की दिशा में किया जा रहे प्रयासों को मान्यता देता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सुषमा शर्मा ने कहा कि नेत्रहीनों के लिए समय-समय पर संस्था का यह प्रयास उन नेत्रहीनों को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है। जो अपनी लगन मेहनत से अपने-अपने लक्ष्य की और अग्रसर है और समाज उनको समानता लाने के लिए नेत्रहीन बालकों को एक दिशा देने का कार्य यह संस्था कर रही है ये साधुवाद की पात्र है। कार्यक्रम में शिवम, सनी यादव, राजेंद्र अध्यापकों के द्वारा बच्चों को तैयार करने के लिए उन्हें सम्मानित किया गया तथा भाग लेने वाले सभी नेत्रहीन बालकों को विद्यालय में अतिथियों के द्वारा सम्मानित किया गया।

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