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जनता की जेब पर महंगाई का वार, मुकेश रस्तोगी की हुंकार-सरकार अब जवाब दो

जनता की जेब पर महंगाई का वार, मुकेश रस्तोगी की हुंकार-सरकार अब जवाब दो

रायबरेली। एक अक्टूबर से गैस सिलेंडर, बैंकिंग सेवाओं, डिजिटल भुगतान और घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े बदलावों को लेकर आम जनता और व्यापारियों के बीच चिंता और नाराजगी बढ़ती दिखाई दे रही है। इन बदलावों को लेकर समाजवादी व्यापार सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं प्रान्तीय व्यापारी नेता मुकेश रस्तोगी ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि महंगाई के लगातार बढ़ते बोझ ने आम आदमी की रसोई से लेकर छोटे व्यापारी की दुकान तक को प्रभावित कर दिया है। श्री रस्तोगी ने कहा कि त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है, लेकिन सरकार के फैसले आम जनता के लिए राहत के बजाय नए आर्थिक बोझ लेकर आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब परिवार त्योहारों और आगामी दीपावली की तैयारियों में जुटे हैं, ऐसे समय में रसोई, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और घरेलू सामान से जुड़े खर्चों में बढ़ोतरी आम परिवार के बजट को सीधे प्रभावित करती है।  उन्होंने कहा कि एक अक्टूबर से 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में विभिन्न शहरों में बढ़ोतरी की गई है। दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2810 तक पहुंच गई है। इसका सीधा असर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, चाय-नाश्ते की दुकानों, हलवाई और कैटरिंग कारोबार पर पड़ सकता है। श्री रस्तोगी ने कहा कि व्यापारी की लागत बढ़ेगी तो उसका असर अंततः ग्राहक की जेब पर ही आएगा।  उन्होंने कहा कि आज छोटा दुकानदार पहले ही किराया, बिजली, कर्मचारियों का वेतन, परिवहन, टैक्स और महंगे कच्चे माल की मार झेल रहा है। ऐसे में लगातार बढ़ती लागत उसके सामने कारोबार चलाने की चुनौती खड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि छोटे व्यापारियों को आर्थिक मजबूती देने की जरूरत है, न कि उनके सामने नए शुल्क और नए नियमों की दीवार खड़ी करने की। एलपीजी से जुड़े आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के मुद्दे पर भी उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का लाभ वास्तविक पात्र उपभोक्ताओं तक आसानी से पहुंचना चाहिए। इसके लिए प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसे गांव, कस्बे और शहर का सामान्य उपभोक्ता बिना परेशानी के पूरा कर सके।  डिजिटल भुगतान को लेकर मुकेश रस्तोगी ने कहा कि छोटे व्यापारियों के लिए ऑनलाइन भुगतान आज कारोबार की आवश्यकता बन चुका है। ऐसे में डिजिटल लेनदेन से जुड़े किसी भी शुल्क या अतिरिक्त लागत का असर व्यापारियों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि छोटे दुकानदारों और व्यापारियों को डिजिटल भुगतान के मामले में अधिकतम राहत और स्पष्ट नियम दिए जाएं।  उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक के सैलरी अकाउंट धारकों के लिए अन्य बैंकों के एटीएम से मुफ्त लेनदेन की सीमा में किए गए बदलाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाओं का इस्तेमाल करने वाला आम ग्राहक पहले से ही विभिन्न शुल्कों को लेकर परेशान रहता है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्कों का बोझ कम किया जाना चाहिए।  इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर भी उन्होंने कहा कि एसी, फ्रिज, टीवी और अन्य घरेलू उपकरण अब मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए पहले की तुलना में महंगे पड़ सकते हैं। दीपावली जैसे बड़े त्योहार से पहले यदि घरेलू सामान की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका असर खरीदारी की क्षमता पर पड़ना स्वाभाविक है।  त्ठप् की आगामी मौद्रिक नीति बैठक का जिक्र करते हुए श्री रस्तोगी ने कहा कि यदि रेपो रेट में वृद्धि होती है तो बैंकिंग क्षेत्र में ब्याज दरों और ईएमआई पर उसका असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव झेल रहे परिवारों के लिए बढ़ी हुई ईएमआई अतिरिक्त चिंता का कारण बन सकती है।  श्री रस्तोगी ने कहा कि महंगाई केवल आंकड़ों और सरकारी रिपोर्टों का विषय नहीं है, बल्कि यह उस परिवार की समस्या है जिसे महीने का राशन खरीदना है, उस व्यापारी की समस्या है जिसे दुकान का किराया देना है और उस युवा की समस्या है जिसे रोजगार और बेहतर भविष्य चाहिए।  उन्होंने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि यदि आम आदमी की आय उसी गति से नहीं बढ़ रही है, जिस गति से उसके खर्च बढ़ रहे हैं, तो आखिर वह अपना परिवार कैसे चलाएगा? उन्होंने कहा कि सरकार को कागजों और आंकड़ों से आगे निकलकर बाजार और आम जनता की वास्तविक स्थिति को समझना होगा।  व्यापारी नेता ने कहा कि जनता की जेब पर लगातार पड़ रहे आर्थिक बोझ को लेकर अब व्यापारी और उपभोक्ता दोनों अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी व्यापार सभा एवं व्यापार मण्डल सदैव व्यापारियों, छोटे दुकानदारों, मध्यम वर्ग और आम उपभोक्ताओं के हितों की आवाज उठाता रहा है और आगे भी महंगाई तथा जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाया जाएगा।  उन्होंने कहा कि जनता को राहत चाहिए, नए आर्थिक बोझ नहीं। व्यापारी को सम्मान और संरक्षण चाहिए, लगातार बढ़ते खर्च नहीं। सरकार को जनता की आवाज सुननी होगी और ऐसी नीतियां बनानी होंगी जिनका केंद्र आम आदमी का हित हो।  मुकेश रस्तोगी ने कहा कि जनता के धैर्य की परीक्षा नहीं ली जानी चाहिए और महंगाई के सवाल पर सरकार को जवाबदेही तय करनी होगी।

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