बाल दिवस और हर वर्ष बढ़ते आंकड़े,जिम्मेदार और एक

बाल दिवस और हर वर्ष बढ़ते आंकड़े,जिम्मेदार और एक
समाज और सरकार के स्तर पर मजबूत इच्छाशक्ति की दरकार..!
विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी
बाल मजदूरी के खिलाफ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल बारह जून को विश्व बाल श्रम निषेध दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का मकसद चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों से काम न करा कर उन्हें पढ़ने-लिखने के लिए जागरूक और प्रेरित करना है। लेकिन रिपोर्ट तो आज कुछ ओर ही बताती है कभी इस ओर किसी सरकार का जिम्मेदार विभाग का ध्यान जाता हैं कि हर वर्ष आंकड़े बढ़े हुए क्यों आते है।जबकि भारत सरकार ने बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए कई कानून बना रखे हैं। बावजूद इसके आज भी लाखों बच्चों का बचपन मजदूरी में निकल जा रहा है। देश के विभिन्न क्षेत्रों में छोटे स्तर पर होटलों, घरों व फैक्टरियों में काम कर या अलग-अलग व्यवसायों में मजदूरी कर लाखों बाल श्रमिक अपने बचपन को तिलांजलि दे रहें हैं। घरेलू कार्य के अलावा पटाखे बनाने, कालीन बुनने, वेल्डिंग करने, ताले बनाने, कांच उद्योग, हीरा उद्योग, माचिस, बीड़ी बनाने, ढाबों में झूठे बर्तन धोने जैसे कामों में बच्चे लगे हैं। इन्हें न तो समाज का कोई संरक्षण मिला है और न ही सरकारी स्तर पर प्रभावी रोक की कोई व्यवस्था है। बाल श्रम को केवल कानून बना कर ही नहीं रोका जा सकता। इसके लिए समाज और सरकार के स्तर पर मजबूत इच्छाशक्ति की दरकार है। तभी हम इस कुत्सित प्रथा से मुक्त हो सकेंगे।



