माँ गोमती पदयात्रा बनी जनआंदोलन, पन्ना घाट से बिलसंडी बुजुर्ग तक उमड़ा जनसैलाब
दीपक सिंह,, सह सम्पादक

माँ गोमती पदयात्रा बनी जनआंदोलन, पन्ना घाट से बिलसंडी बुजुर्ग तक उमड़ा जनसैलाब
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पदयात्रा का भव्य शुभारंभ, आस्था के साथ लिया संकल्प
बंडा स्थित श्री सोनासीरनाथ बाबा मंदिर में माँ गोमती पदयात्रा का शुभारंभ अत्यंत श्रद्धा और विधि-विधान के साथ किया गया। सुबह की पवित्र बेला में सैकड़ों श्रद्धालु एकत्र हुए और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गोमती की आराधना की गई। इस अवसर पर उपस्थित संतों और आयोजकों ने सभी श्रद्धालुओं को यह संदेश दिया कि यह यात्रा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और पर्यावरणीय आंदोलन भी है। यात्रा के प्रारंभ में ही सभी प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इस दौरान स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और यात्रा को सफल बनाने का आश्वासन दिया। इस भव्य शुरुआत ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह पदयात्रा आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेने जा रही है।
मजरिया घाट पर पूजन, भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
पदयात्रा जब मजरिया घाट पहुँची, तो वहाँ का दृश्य अत्यंत भावुक और आध्यात्मिक हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ के दर्शन किए और उसके बाद माँ गोमती के तट पर विधिवत पूजन-अर्चना की। नदी की स्वच्छ धारा को देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और कई लोगों ने इसे एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभव बताया। इस दौरान महंत जी द्वारा आशीर्वाद दिया गया और सभी से नदी के संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की गई। पूजन के समय पूरे वातावरण में भक्ति और श्रद्धा का माहौल था, जहाँ “हर हर महादेव” और “जय माँ गोमती” के जयकारों से पूरा घाट गूंज उठा। यह पड़ाव न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने लोगों के मन में नदी के प्रति भावनात्मक जुड़ाव को भी और मजबूत किया।

पन्ना घाट पर भव्य स्वागत, जनसैलाब ने बढ़ाया उत्साह
शाहजहाँपुर के पन्ना घाट पर पदयात्रा का भव्य स्वागत किया गया, जहाँ हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन बड़े स्तर पर किया गया था, जिसमें मंच, स्वागत द्वार और जनसभा की विशेष व्यवस्था की गई थी। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। लोगों ने पुष्पवर्षा कर पदयात्रियों का स्वागत किया और माँ गोमती के जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। इस भव्य आयोजन ने यह दिखा दिया कि यह यात्रा अब केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि व्यापक जनसमर्थन प्राप्त कर रही है। स्थानीय नागरिकों ने इस अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया और आयोजकों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। पन्ना घाट का यह पड़ाव पदयात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
माँ गोमती को जल और संरक्षण की सख्त जरूरत
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने माँ गोमती की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि लगातार घटते जलस्तर और बढ़ते प्रदूषण के कारण नदी का अस्तित्व संकट में है। यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। वक्ताओं ने बताया कि नदी के प्राकृतिक वेटलैंड्स और जल स्रोतों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही स्रोत नदी को जीवित रखते हैं। इसके साथ ही अवैध खनन और अतिक्रमण को भी नदी के लिए बड़ा खतरा बताया गया। उन्होंने सरकार और प्रशासन से अपील की कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए विशेष योजनाएं लागू करें। इस मुद्दे ने सभा में उपस्थित सभी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया।

राज्य नदी का दर्जा देने की उठी मांग
कार्यक्रम के दौरान माँ गोमती को राज्य नदी घोषित करने की मांग जोर-शोर से उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि गोमती नदी उत्तर प्रदेश की जीवनरेखा है और इसे विशेष संरक्षण की आवश्यकता है। राज्य नदी का दर्जा मिलने से इसके संरक्षण और विकास के लिए अलग से बजट और योजनाएं बनाई जा सकेंगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह नदी प्रदेश के कई जिलों को जोड़ती है और लाखों लोगों की आजीविका का आधार है। इसके बावजूद इसे वह महत्व नहीं मिल पा रहा है, जिसकी यह हकदार है। इस मांग को लेकर उपस्थित लोगों ने भी समर्थन जताया और सरकार से जल्द निर्णय लेने की अपील की। यह मुद्दा पदयात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में से एक बनकर उभर रहा है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश, प्लास्टिक मुक्त अभियान पर जोर
पदयात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। आयोजकों ने लोगों से अपील की कि वे नदी किनारे प्लास्टिक और पन्नी का उपयोग पूरी तरह बंद करें। उन्होंने बताया कि प्लास्टिक कचरा नदी को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है और इससे जल प्रदूषण तेजी से बढ़ता है। इसके स्थान पर प्राकृतिक और जैविक सामग्री का उपयोग करने पर जोर दिया गया। लोगों को आटे के दीये, पत्तों के दोने और कागज आधारित सामग्री अपनाने के लिए प्रेरित किया गया। इस पहल को लोगों ने सकारात्मक रूप से लिया और कई लोगों ने तुरंत ही प्लास्टिक का उपयोग बंद करने का संकल्प लिया। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

टेढ़ेनाथ बाबा मंदिर में विशेष धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम
पदयात्रा के अगले पड़ाव के रूप में टेढ़ेनाथ बाबा मंदिर में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यहाँ रात्रि विश्राम के साथ-साथ सुबह स्वच्छता अभियान, हवन-पूजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे। इसके अलावा शाम को भव्य आरती और विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और समाजसेवी अपने विचार साझा करेंगे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और उन्हें इस अभियान से जोड़ना है। आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और वे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित होते हैं। यह पड़ाव यात्रा के लिए एक महत्वपूर्ण चरण साबित होगा।

बिलसंडी बुजुर्ग में प्रेरणादायक कार्यक्रम, समाज को मिला संदेश
बिलसंडी बुजुर्ग ग्राम में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। यहाँ एक भव्य कथा पंडाल में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें लोगों को माँ गोमती के संरक्षण का महत्व बताया गया। इस अवसर पर आयोजकों ने कथा वाचकों और सहयोगियों को सम्मानित किया और उनके योगदान की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने लोगों से अपील की कि वे अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं। इस कार्यक्रम ने समाज में सकारात्मक संदेश फैलाने का कार्य किया और लोगों को इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
SvasJsNews अपील करता है कि अधिक से अधिक लोग इस जनआंदोलन से जुड़ें और माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाए रखने के इस पवित्र संकल्प में सहभागी बनें। 🌿




