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एफआरयू ऊंचाहार से शुरू हुई एफसीएम इंजेक्शन की सुविधागर्भवतियों को राहत

एफआरयू ऊंचाहार से शुरू हुई एफसीएम इंजेक्शन की सुविधा
गर्भवतियों को राहत


रायबरेली, 21 मार्च 2026
          हर वर्ष 21 मार्च को एनीमिया दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में शनिवार को फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) ऊंचाहार में एनीमिया प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। गंभीर एनीमिया से ग्रसित दो गर्भवती महिलाओं को फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज़ (एफसीएम) इंजेक्शन लगाया गया।
           चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि मध्यम एवं गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं के बेहतर प्रबंधन के लिए एफसीएम इंजेक्शन लगाने की शुरुआत  ऊंचाहार एफआरयू  से हुई है। उन्होंने बताया कि फिलहाल दो गर्भवतियों को यह इंजेक्शन लगाया गया है। एफसीएम की विशेषता यह है कि गर्भवती को इसकी केवल एक डोज लेनी होती है, जिससे हीमोग्लोबिन स्तर में तेजी से सुधार संभव होता है।
           उन्होंने कहा कि इस पहल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि महिलाओं को बार-बार अस्पताल नहीं आना पड़ेगा। अब तक एनीमिया से ग्रसित गर्भवतियों को आयरन सुक्रोज इंजेक्शन की पांच डोज दी जाती थीं, जिसके लिए उन्हें कई बार अस्पताल आना पड़ता था। ऐसे में कई महिलाएं नियमित रूप से अस्पताल नहीं आ पाती थीं और एनीमिया की स्थिति बनी रहती थी।
          इस अवसर पर गर्भवती महिलाओं को पोषण, आयरन युक्त आहार तथा नियमित एएनसी (एंटिनेटल केयर) सेवाओं के महत्व के बारे में भी परामर्श दिया गया।

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          मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि गंभीर एनीमिया से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में जनपद में एफआरयू ऊंचाहार  में यहपहल शुरू की गई है | एफसीएम इंजेक्शन की सुविधा ऊंचाहार के अलावा चार अन्य एफआरयू – डलमऊ, लालगंज, बछरावां सलोन  पर भी है।
          इस पहल के माध्यम से गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को कम समय में दूर करने में सहायता मिलेगी, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में यह पहल रायबरेली जनपद में पायलट रूप में प्रारंभ की गई है। इसके अंतर्गत राज्य स्तर से केजीएमयू एवं यूपीटीएसयू टीम द्वारा चिकित्सकों और स्टाफ नर्सों को विशेष प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया है। यह कार्यक्रम प्रदेश को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और मातृ स्वास्थ्य सुधार के प्रति स्वास्थ्य विभाग की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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