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शीतला अष्टमी पर परंपरागत श्रद्धा के साथ राधा-पुआ का भोग, परिवारों में आस्था का माहौल

शीतला अष्टमी पर परंपरागत श्रद्धा के साथ राधा-पुआ का भोग, परिवारों में आस्था का माहौल

रिपोर्ट: सत्यनारायण सेन, गुरला (भीलवाड़ा)
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भीलवाड़ा। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुरला क्षेत्र स्थित आजादनगर में शीतला अष्टमी (बसोड़ा) के पावन अवसर पर सेन परिवार द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ माता शीतला की पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर परिवार में विशेष रूप से राधा-पुआ सहित विभिन्न पारंपरिक व्यंजन तैयार कर माता को भोग अर्पित किया गया। जानकारी के अनुसार शीतला अष्टमी के पर्व पर घरों में एक दिन पूर्व यानी सप्तमी के दिन ही भोजन तैयार कर लिया जाता है। इसी परंपरा का पालन करते हुए सेन परिवार द्वारा राधा-पुआ (मीठा पुआ), हलवा, पूरी, रबड़ी, दही, पापड़ और पकोड़े जैसे कई व्यंजन बनाए गए। अगले दिन अष्टमी तिथि को माता शीतला को इन व्यंजनों का भोग लगाया गया और प्रसाद के रूप में परिवार व श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।

इस दिन की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा यह मानी जाती है कि अष्टमी के दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और ताज़ा भोजन नहीं बनाया जाता। श्रद्धालु केवल एक दिन पहले तैयार किए गए ठंडे या बासी भोजन को ही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इससे माता शीतला प्रसन्न होती हैं और परिवार को रोगों व महामारी से रक्षा प्रदान करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शीतला माता को चेचक, खसरा तथा अन्य संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। इसी आस्था के चलते हर वर्ष बड़ी श्रद्धा और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ यह पर्व मनाया जाता है। गुरला क्षेत्र में भी इस अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह और भक्ति का वातावरण देखने को मिला।

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