गुरलां में 1100 साल पुराने लक्ष्मीनाथ मंदिर नवनिर्माण की नींव रखी SvasJsNews

गुरलां में 1100 साल पुराने लक्ष्मीनाथ मंदिर नवनिर्माण की नींव रखी
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राजस्थान के गुरलां गांव में स्थित करीब 900 से 1100 वर्ष पुराने प्राचीन लक्ष्मीनाथ मंदिर के नवनिर्माण के लिए गुरुवार को विधि-विधान के साथ भूमिपूजन और नींव पूजन का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक और धार्मिक अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु, स्थानीय गणमान्य नागरिक और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। गुरुवार को आयोजित इस शुभ कार्यक्रम में मंदिर नवनिर्माण की आधारशिला रखते हुए पांच ईंटों का पूजन किया गया। पंडितों के वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक विधियों के बीच मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य विधिवत प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का वातावरण देखने को मिला। भूमिपूजन की धार्मिक विधि गुरला के पंडित पंकज दाधीच और प्रकाश दाधीच के सानिध्य में संपन्न हुई। उन्होंने पारंपरिक वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर मंदिर निर्माण के कार्य का शुभारंभ कराया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान लक्ष्मीनाथ से क्षेत्र की सुख-समृद्धि और कल्याण की प्रार्थना की।

मंदिर नवनिर्माण समिति के सदस्यों ने बताया कि गुरलां का लक्ष्मीनाथ मंदिर लगभग 900 से 1100 वर्ष पुराना है और यह क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। समय के साथ मंदिर के पुराने ढांचे में जर्जरता आने के कारण अब इसे भव्य और आकर्षक स्वरूप में पुनः निर्मित करने का निर्णय लिया गया है। मंदिर के नवनिर्माण के लिए क्षेत्र के दानदाताओं और श्रद्धालुओं द्वारा उदारतापूर्वक आर्थिक सहयोग भी दिया जा रहा है। कार्यक्रम में गुरला ठिकाना के कुंवर महेन्द्र सिंह पुरावत सहित अनेक समाजसेवी और ग्रामीण मौजूद रहे। इनमें कजोडी मल सेन, घनश्याम शर्मा कारोई, गोवर्धन दाधीच, सूर्य प्रकाश पारीक, रतन सोत्रीय, रामचंद्र सुवालका, कमल किशोर त्रिपाठी, बालूराम दरोगा, रामपाल दाधीच, सत्यनारायण शर्मा, उदयराम सेन, हरक लाल सेन, सत्यनारायण सेन, ललित दाधीच, दीपक दाधीच, मुकेश सोनी, सत्यनारायण वर्मा, किशनदास, वासुदेव दाधीच और बाबूलाल दाधीच सहित कई श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंदिर नवनिर्माण समिति ने कहा कि सभी धर्मप्रेमियों और भक्तों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कार्य जल्द पूरा करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि आने वाले समय में यह मंदिर और अधिक भव्य रूप में श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध हो सके। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित भक्तों को प्रसाद स्वरूप मिठाई वितरित की गई। इस दौरान पूरे परिसर में “लक्ष्मीनाथ ठाकुर की जय” के जयघोष गूंजते रहे, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।



