विधानसभा में जिंदल सॉ लिमिटेड के खनन पट्टों पर गरमााया सदन

विधानसभा में जिंदल सॉ लिमिटेड के खनन पट्टों पर गरमााया सदन
SvasJsNews
भीलवाड़ा, 24 फरवरी। राजस्थान विधानसभा में आज उद्योग और खनन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा जोरदार ढंग से उठा। भीलवाड़ा से विधायक अशोक कुमार कोठारी ने नियम 131 के तहत ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए जिंदल सॉ लिमिटेड को वर्ष 2010 में आवंटित खनन पट्टों में कथित अनियमितताओं का मामला सदन के पटल पर रखा। मंत्री के जवाब को अपूर्ण बताते हुए विधायक ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की, जिस पर सरकार ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। विधायक कोठारी ने आरोप लगाया कि खनन लीज आवंटन के दौरान Mines and Minerals Development and Regulation Act 1957 की धारा 11(5) के प्रावधानों की अनदेखी की गई और केंद्र सरकार की स्वीकृति के बिना लीज प्रदान कर दी गई। उन्होंने कहा कि “पहले आओ-पहले पाओ” नियम लागू नहीं हो सकता था क्योंकि अन्य आवेदन लंबित थे। सदन में यह भी मुद्दा उठा कि कंपनी को 30 वर्ष की लीज देते समय 4 वर्ष में स्टील प्लांट स्थापित करने और 10 करोड़ रुपये की कीननेस मनी जमा कराने की शर्त थी। आरोप है कि 15 वर्ष बीतने के बाद भी प्लांट स्थापित नहीं हुआ, फिर भी कीननेस मनी वापस लौटा दी गई। बिना प्लांट स्थापना के लौह अयस्क राज्य से बाहर भेजे जाने से राजस्व और डीएमएफटी फंड को नुकसान होने की बात भी उठाई गई।

पर्यावरणीय मानकों और न्यायालयीन आदेशों की अवहेलना का मुद्दा भी प्रमुख रहा। विधायक ने नदी-नालों, कैचमेंट एरिया और ग्रामीण मार्गों को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए तथा मामले के National Green Tribunal में विचाराधीन रहने का उल्लेख किया। चारागाह भूमि, रामधाम आरओबी निर्माण, सीएसआर मद में राशि दर्शाने तथा लापिया प्वाइंट पर कथित अवैध ब्लास्टिंग जैसे मुद्दों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। डीजीएमएस से भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई।विधायक कोठारी ने स्पष्ट कहा कि उद्योग विकास के लिए आवश्यक हैं, लेकिन नियमों से ऊपर कोई नहीं। सरकार ने सदन को भरोसा दिलाया कि सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि अनियमितताएं पाई गईं तो नियमानुसार कार्रवाई होगी।



