नगर निगम सहारनपुर के निर्माण विभाग में अनियमितताओं के आरोप, टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल…

नगर निगम सहारनपुर के निर्माण विभाग में अनियमितताओं के आरोप, टेंडर प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल…
पूर्ण खबर विभागीय सूत्रों पर आधारित…
विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी
सहारनपुर नगर निगम के निर्माण विभाग में टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं और संभावित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आ रहे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, विभाग में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए ठेकेदारों की डिवाइसें एकत्रित कर एक ही लैपटॉप के माध्यम से टेंडर “पुल” करने की तैयारी की जा रही है। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।
विभागीय सूत्रों का यह भी दावा है कि कुछ चुनिंदा और प्रभावशाली ठेकेदारों को आपसी सेटिंग के आधार पर 20 से 30 कार्य दिए जाने की प्रबल संभावना है। इससे न केवल प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है, बल्कि छोटे और ईमानदार ठेकेदारों के अवसर भी सीमित होते नजर आ रहे हैं।
इसी बीच, विभागीय सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने और “मैनेज” करने के लिए कथित तौर पर भारी-भरकम रकम के लेन-देन की तैयारी की जा रही है। यदि इस प्रकार का धन लेन-देन होता है, तो यह पूरे मामले को और अधिक गंभीर बना देता है और भ्रष्टाचार की आशंकाओं को मजबूत करता है। इस पूरे मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है, जो वित्तीय दृष्टि से भी चिंताजनक है। पहले निर्माण कार्यों के टेंडर लगभग 15 से 17 प्रतिशत कम दर (लोअर रेट) पर स्वीकृत होते थे, जिससे नगर निगम को सीधा आर्थिक लाभ मिलता था और राजस्व की बचत होती थी। लेकिन अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिल रही है कि कार्यों को “एस्टीमेट रेट” (निर्धारित दर) पर ही आवंटित किए जाने की तैयारी है। यदि ऐसा होता है, तो इससे नगर निगम को संभावित राजस्व हानि हो सकती है और सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल उठ सकते हैं।
वहीं, टेंडर की निर्धारित तिथि में बदलाव को लेकर भी संदेह की स्थिति बनी हुई है। पहले यह टेंडर 23 फरवरी 2026 को प्रस्तावित था, जबकि अब विभागीय सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस तिथि को आगे बढ़ाकर नई तारीख दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। आरोप है कि यह बदलाव भी सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि विशेष परिस्थितियों और दबाव में किया गया है।
स्थानीय नागरिकों और संबंधित सूत्रों का कहना है कि यदि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य उजागर हो सकते हैं। लोगों का यह भी मानना है कि इस तरह की अनियमितताएं न केवल सरकारी व्यवस्था पर विश्वास को कमजोर करती हैं, बल्कि विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन और उच्च अधिकारी इस मामले को कितनी गंभीरता से लेते हैं और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला आगे और बड़ा रूप ले सकता है।



