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यूजीसीओ नियमों पर उठी आवाज, 83% जनता के हित की मांग तेज।

यूजीसीओ नियमों पर उठी आवाज, 83% जनता के हित की मांग तेज।

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पूरनपुर/पीलीभीत– पिछड़ा दलित व समस्त पिछड़ा वर्ग अधिवक्ता समाज की ओर से यूजीसीओ (UGCO) से संबंधित नियमों को लेकर एक महत्वपूर्ण ज्ञापन सौंपा गया है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह नियम देश की लगभग 83 प्रतिशत आबादी—पिछड़े और दलित वर्ग—के अधिकारों की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। ज्ञापन के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, भारत सरकार, नई दिल्ली को संबोधित करते हुए उपजिलाधिकारी पूरनपुर को अवगत कराया गया कि सामाजिक न्याय और समान अवसर की भावना को मजबूत करने के लिए यह नियम समय की मांग है। पिछड़ा दलित एवं समस्त पिछड़ा दलित अधिवक्ता समाज के संयोजक दामोदर प्रसाद एडवोकेट ने कहा कि यदि यूजीसीओ के इस प्रावधान को रोका गया तो देश की बहुसंख्यक आबादी में असंतोष उत्पन्न हो सकता है, जो व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकता है।


ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक राष्ट्र में नीतियां बनाते समय उस वर्ग के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए जो संख्या में अधिक है और लंबे समय से सामाजिक व शैक्षिक रूप से वंचित रहा है। प्रतिनिधियों ने कहा कि यह केवल एक नियम नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन और न्याय की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है।पिछड़ा दलित वर्ग संघ, उत्तर प्रदेश के पदाधिकारियों ने प्रशासन से अपेक्षा जताई कि इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों की अनदेखी की गई तो लोकतांत्रिक तरीकों से व्यापक आंदोलन किया जाएगा। बातचीत में संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव नहीं, बल्कि संविधान प्रदत्त अधिकारों की रक्षा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस ज्ञापन पर क्या रुख अपनाती है और 83 प्रतिशत आबादी के हितों को किस प्रकार प्राथमिकता देती है।

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