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126वें वार्षिक रामलीला महोत्सव में उमड़ी दर्शकों की भीड़, दिल्ली के उद्योगपति नागेंद्र मिश्रा ने फीता काटकर किया शुभारंभ

संवाददाता: अभिषेक मिश्रा | SvasJsNews

धनुष भंग लीला में गूंजे जय श्रीराम के जयकारे, परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां

126वें वार्षिक रामलीला महोत्सव में उमड़ी दर्शकों की भीड़, दिल्ली के उद्योगपति नागेंद्र मिश्रा ने फीता काटकर किया शुभारंभ

संवाददाता: अभिषेक मिश्रा | SvasJsNews

कुदरकोट (औरैया)। उत्तर प्रदेश के औरैया जनपद की बिधूना तहसील के अंतर्गत ग्राम कुदरकोट में आयोजित 126वें वार्षिक रामलीला महोत्सव में भक्ति, आस्था और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। महोत्सव के दौरान आयोजित विशाल धनुष भंग लीला में भगवान श्रीराम के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। वहीं, धनुष भंग के बाद हुए परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने अपने दमदार अभिनय और प्रभावशाली संवादों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं दिल्ली के उद्योगपति नागेंद्र मिश्रा ने फीता काटकर किया। इसके बाद कलाकारों ने रामायण के महत्वपूर्ण प्रसंग धनुष भंग लीला का भावपूर्ण मंचन किया। लीला देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और क्षेत्रीय दर्शक मौजूद रहे। कलाकारों की प्रस्तुति के दौरान दर्शक पूरे उत्साह के साथ धार्मिक प्रसंगों का आनंद लेते नजर आए।

शिव धनुष टूटते ही गूंजे जय श्रीराम के जयकारे

धनुष भंग लीला का सबसे रोमांचक क्षण उस समय आया, जब भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से शिव धनुष उठाकर उसका भंग किया। इस दृश्य का मंचन होते ही रामलीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भगवान श्रीराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। कलाकारों की भावपूर्ण प्रस्तुति ने रामायण के इस प्रसंग को जीवंत कर दिया।

परशुराम-लक्ष्मण संवाद ने बांधा समां

धनुष भंग के बाद मंचित परशुराम-लक्ष्मण संवाद कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। भगवान परशुराम और लक्ष्मण के बीच हुए तीखे संवादों, प्रभावशाली वाणी और दमदार अभिनय ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। दोनों पात्रों की संवाद अदायगी पर दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। इस प्रसंग में जहां परशुराम के तेज और क्रोध का प्रभावशाली चित्रण देखने को मिला, वहीं लक्ष्मण के साहस और निर्भीक व्यक्तित्व ने भी दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना महोत्सव

126 वर्षों से आयोजित हो रहा रामलीला महोत्सव क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। रामलीला के माध्यम से नई पीढ़ी को भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, सत्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। ऐसे आयोजन सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को संजोने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।


कार्यक्रम के दौरान विपिन विहारी दीक्षित, अभिषेक मिश्रा, आशीष सविता, आशाराम तिवारी, सोनू कक्का, गुड्डू दीक्षित, पुईया शर्मा, चन्दन तिवारी, तरुण, कौशलेन्द्र, बलराज यादव सहित अनेक श्रद्धालु एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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