गंगापुर में गवरी देखने के लिए उमड़ी भीड़, (राजस्थानी लोक संस्कृति की दिखी झलक)

गंगापुर में गवरी देखने के लिए उमड़ी भीड़, (राजस्थानी लोक संस्कृति की दिखी झलक)
संवाददाता- सत्यनारायण सेन गुरला
जिले के गंगापुर में गाडरी खेड़ा स्थित चामुंडा माता मंदिर परिसर में मेवाड़ की प्रसिद्ध गवरी का आयोजन हुआ। पुजारी गोपाल लाल बागरी ने चामुंडा माता की पूजा अर्चना की उसके पश्चात गवरी प्रारंभ हुई जिसमें वरनी गांव के प्रसिद्ध कलाकार राजू भील के नेतृत्व में भील समाज के कलाकारों ने गवरी की प्रस्तुति दी, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे उमड़ पड़े। कलाकारों ने तीन गिलासों पर पानी से भरी मटकी रखकर संतुलन के साथ अद्भुत नृत्य कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस गवरी के आयोजक श्रद्धालु भेरूलाल खटीक ने बताया कि
गवरी मेवाड़ के भील समुदाय का सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध लोक-नाट्य है। इसे केवल सावन-भादो के 40 दिनों तक खेला जाता है।इसकी मुख्य कथावस्तु भगवान शिव और पार्वती के इर्द-गिर्द घूमती है। मान्यता है कि पार्वती ने एक बार भीलों के साथ पृथ्वी पर रहने की इच्छा व्यक्त की, जिसके बाद शिव जी ने उन्हें भीलों के साथ भेजा। इसी दौरान घटित घटनाओं, राक्षसों के वध, देवी-देवताओं की लीलाओं और सामाजिक बुराइयों पर प्रहार की कहानियों को गवरी के माध्यम से मंचित किया जाता है।
गवरी में मुख्य पात्र बुढ़िया (शिव), राय-बूड़िया (पार्वती), कुटकड़िया (सूत्रधार), पाट-भोपा, कान-गूजरी आदि होते हैं।राजस्थानी संस्कृति के इस अद्भुत संगम को देख दर्शकों ने जमकर सराहना की और दिनभर गवरी का आनंद लिया।





