धौरहरा सीएचसी में पहली बार ऑपरेशन से गूंजी किलकारीअब खीरी की सभी तहसीलों में उपलब्ध हुई सिजेरियन प्रसव की सुविधा

धौरहरा सीएचसी में पहली बार ऑपरेशन से गूंजी किलकारी
अब खीरी की सभी तहसीलों में उपलब्ध हुई सिजेरियन प्रसव की सुविधा
ब्यूरो रिपोर्टर- तुषार शुक्ला
लखीमपुर खीरी। जिले के स्वास्थ्य विभाग ने गुरुवार 24 सितंबर को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष कुमार गुप्ता के निर्देशन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) धौरहरा में पहली बार सफल सिजेरियन प्रसव कराया गया। इसके साथ ही जिले की सभी तहसीलों में गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध हो गई है।
सीएमओ डॉ. संतोष गुप्ता ने बताया कि सीएचसी धौरहरा में रामनगर लहाबड़ी निवासी जासमीन पत्नी रविउल्ला का सफल सिजेरियन ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन के बाद महिला ने 2970 ग्राम वजन की स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित और स्वस्थ हैं।
जिले में सात प्रथम संदर्भन इकाइयां सक्रिय
सीएमओ ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जनपद में अब सात प्रथम संदर्भन इकाइयां (FRU) सक्रिय हो गई हैं। जिला महिला चिकित्सालय के अलावा सीएचसी गोला, पलिया, मोहम्मदी, मितौली और निघासन में पहले से सिजेरियन प्रसव की सुविधा उपलब्ध थी। अब धौरहरा सीएचसी भी इस व्यवस्था से जुड़ गई है।
हालांकि सीएचसी निघासन और धौरहरा में फिलहाल इलेक्टिव सिजेरियन की सुविधा उपलब्ध है। आने वाले समय में यहां इमरजेंसी सिजेरियन की सुविधा भी शुरू किए जाने की योजना है।
विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया ऑपरेशन
सीएचसी अधीक्षक डॉ. रवि कुमार सिंह के प्रयासों से शुरू हुई इस सुविधा के तहत पहला ऑपरेशन विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने किया। इसमें सर्जन डॉ. नमरा मुईद, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. शिव पूजन अवस्थी, डॉ. संतोष निराला और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. फरहान हाशमी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। फार्मासिस्ट नवीन वर्मा, स्टाफ नर्स रजनी वी. नायर, आरती देवी और सहयोगी राजवीर ने भी ऑपरेशन में सहयोग किया।
धौरहरा क्षेत्र की महिलाओं को मिलेगी राहत
डॉ. रवि कुमार सिंह ने बताया कि अब सीएचसी धौरहरा में सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध रहेगी। इससे धौरहरा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान जटिलता होने पर दूर के अस्पतालों या निजी नर्सिंग होम पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। स्थानीय स्तर पर सुविधा उपलब्ध होने से महिलाओं को समय पर उपचार मिलने के साथ ही आर्थिक और शारीरिक परेशानी से भी राहत मिलेगी।



