पत्रकार अरशद अली के पिता का निधन परिवार और रिश्तेदारों मै शौक का माहौल।
ब्यूरो रिपोर्ट उत्तर प्रदेश

पत्रकार अरशद अली के पिता का निधन परिवार और रिश्तेदारों मै शौक का माहौल।
बिजनौर/स्योहारा। पत्रकार अरशद अली के पिता अशरफ अली का 11 सितंबर को अचानक निधन हो गया। करीब 70 वर्ष की आयु में उनके निधन की खबर से परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। अशरफ अली का जीवन सादगी, शालीनता और शांत स्वभाव के लिए जाना जाता था। उनके निधन से परिवार ने एक ऐसे बुजुर्ग को खो दिया, जिनकी मौजूदगी घर-परिवार के लिए हमेशा मार्गदर्शन और आत्मीयता का आधार रही। अशरफ अली के निधन की खबर सामने आते ही उनके परिचितों और शुभचिंतकों ने परिवार से संपर्क कर संवेदना व्यक्त की। लोगों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए दुआ की और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत और सब्र देने की प्रार्थना की। परिवार के लिए यह क्षण बेहद भावुक और पीड़ादायक है, क्योंकि एक पिता का साया अचानक उठ जाना अपने आप में गहरा आघात होता है। अशरफ अली के व्यक्तित्व की सबसे खास बात उनकी सादगी थी। उन्होंने जीवन को दिखावे से दूर रहकर अपने तरीके से जिया। वह कम बोलते थे, लेकिन जब भी बोलते थे तो उनकी बातों में अनुभव और अपनापन दिखाई देता था। आधुनिक जीवन की भागदौड़ और दिखावे की संस्कृति से उनका विशेष लगाव नहीं था। उन्हें अपनी छोटी-सी दुनिया में परिवार और अपनों के बीच सुकून से रहना पसंद था।

बताया जाता है कि उन्हें पुराने दौर के रेडियो से विशेष लगाव था। रेडियो पर समाचार सुनना और पुराने संगीत का आनंद लेना उनकी दिनचर्या का हिस्सा रहा। उस दौर में जब मनोरंजन के साधन सीमित हुआ करते थे, रेडियो घरों का महत्वपूर्ण साथी हुआ करता था। अशरफ अली के लिए भी रेडियो केवल एक उपकरण नहीं बल्कि पुराने समय की यादों से जुड़ा एक साथी था। समाचार सुनने के साथ-साथ पुराने गीतों की धुनों का आनंद लेना उन्हें पसंद था। उनका जीवन बहुत सामान्य था, लेकिन उनकी सोच और व्यवहार में एक अलग तरह की गंभीरता दिखाई देती थी। वह दूसरों के निजी मामलों में अनावश्यक हस्तक्षेप नहीं करते थे। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने का अधिकार है। इसी वजह से परिवार और परिचितों के बीच उनकी छवि एक शांत, समझदार और सुलझे हुए व्यक्ति की रही।
परिवार के प्रति रहा गहरा लगाव
अशरफ अली का अपने परिवार के प्रति गहरा लगाव था। पत्नी के निधन के बाद उन्होंने जीवन का लंबा समय अकेलेपन और जिम्मेदारियों के बीच बिताया। इसके बावजूद उन्होंने परिस्थितियों का सामना धैर्य के साथ किया। अपने बच्चों के प्रति उनका स्नेह हमेशा बना रहा। परिवार के सदस्यों के सुख-दुख में उनकी भावनात्मक मौजूदगी महत्वपूर्ण रही। बेटे अरशद अली के साथ उनका विशेष आत्मीय संबंध था। अरशद अली पत्रकारिता से जुड़े होने के कारण सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहते हैं। पिता-पुत्र के बीच सिर्फ पारिवारिक रिश्ता ही नहीं बल्कि मित्रवत आत्मीयता भी थी। अरशद अली अपने पिता से अपनी जिंदगी की कई बातें साझा करते थे। पिता भी बेटे की तरक्की, मेहनत और सामाजिक गतिविधियों को लेकर संतुष्ट और खुश रहते थे। परिवार के लोगों के लिए अशरफ अली केवल घर के बुजुर्ग नहीं थे, बल्कि अनुभव और स्नेह का वह केंद्र थे, जिसके आसपास परिवार की कई यादें जुड़ी हुई थीं। उनकी मौजूदगी से घर में एक भरोसा बना रहता था। अब उनके जाने के बाद परिवार को उसी भरोसे और अपनापन की कमी महसूस होगी।
बेटे की तरक्की से होते थे खुश
अरशद अली के पत्रकारिता और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहने पर अशरफ अली को खुशी होती थी। बेटे द्वारा मेहनत से अपना कार्य करने और लोगों के बीच सक्रिय रहने को वह सकारात्मक रूप में देखते थे। परिवार से जुड़े लोगों के अनुसार बेटे की उपलब्धियां और मेहनत उन्हें प्रसन्न करती थीं। एक पिता के लिए संतान की मेहनत और सफलता सबसे बड़ी खुशी में से एक होती है। अशरफ अली भी इससे अलग नहीं थे। वह अपने बच्चों के प्रति हमेशा स्नेह रखते थे। विशेष रूप से अरशद अली से उनका भावनात्मक जुड़ाव अधिक रहा। पिता-पुत्र के बीच होने वाली बातचीत में परिवार, समाज और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषय शामिल रहते थे। अरशद अली के लिए पिता का निधन इसलिए भी बेहद भावुक करने वाला है, क्योंकि जीवन के हर महत्वपूर्ण दौर में पिता का साया एक मजबूत सहारे की तरह रहा। पिता के साथ बिताए छोटे-छोटे पल अब यादों का हिस्सा बन गए हैं।
बीमारी के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत
परिवार के अनुसार अशरफ अली की तबीयत पिछले कुछ दिनों से ठीक नहीं चल रही थी। बीच में स्वास्थ्य में कुछ सुधार भी हुआ था और परिवार को उम्मीद थी कि वह जल्द सामान्य स्थिति में लौट आएंगे। लेकिन 11 सितंबर को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और उनका निधन हो गया। परिवार के लिए यह घटना अचानक आई। कुछ समय पहले तक जिनसे बातचीत और मुलाकात हो रही थी, उनका इस तरह चले जाना अपनों के लिए गहरे सदमे से कम नहीं है। निधन की सूचना मिलते ही परिवार में मातम छा गया। रिश्तेदार और परिचित घर पहुंचने लगे और परिवार को सांत्वना देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोगों ने कहा कि किसी अपने के जाने का दुख शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। खासकर परिवार के बुजुर्ग सदस्य का निधन पूरे परिवार को भावनात्मक रूप से प्रभावित करता है। अशरफ अली के निधन से उनके जानने वालों के बीच भी उनके सरल व्यवहार और आत्मीयता की यादें ताजा हो गईं।
जिस स्कूल से जुड़ा रहा नाम, वहां भी शोक
अशरफ अली के निधन से जुड़े समाचार में एक भावुक संयोग भी सामने आया है। उनके बेटे पत्रकार अरशद अली का संबंध जिस स्कूल परिवार से रहा, उसी संस्थान का नाम उनके पिता के नाम से जुड़ा हुआ था। इससे परिवार और स्कूल से जुड़े लोगों के बीच इस निधन की खबर और भी भावनात्मक बन गई। ए. जेड. इस्लामिया इंटर कॉलेज जैसे शिक्षण संस्थान समाज में शिक्षा के साथ-साथ पीढ़ियों को जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे संस्थान से जुड़े किसी व्यक्ति के परिवार में दुखद घटना होने पर विद्यालय परिवार की संवेदनाएं स्वाभाविक रूप से परिवार के साथ होती हैं। अशरफ अली के निधन की खबर मिलने पर स्कूल परिवार की ओर से भी शोक व्यक्त किया गया और परिवार के प्रति संवेदना जताई गई। विद्यालय परिवार से जुड़े लोगों ने दिवंगत के लिए दुआ और परिवार के लिए सब्र की प्रार्थना की। शिक्षण संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं होते, बल्कि उनसे जुड़े शिक्षक, कर्मचारी, विद्यार्थी और अभिभावक एक बड़े सामाजिक परिवार का हिस्सा बन जाते हैं। ऐसे में किसी परिवार के दुख में संस्थान का साथ खड़ा होना मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण है।
सादगी को बनाया जीवन का आधार
अशरफ अली का जीवन यह संदेश देता है कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद, धन या प्रसिद्धि से नहीं होती। सरल जीवन जीने वाला व्यक्ति भी अपने व्यवहार और रिश्तों के माध्यम से लोगों के दिलों में जगह बना सकता है। वह दिखावे से दूर रहते थे। उन्हें अनावश्यक खर्च, बनावटी जीवनशैली और लोगों के निजी मामलों में दखल पसंद नहीं था। उनका विश्वास सामान्य जीवन और परिवार के बीच संतोषपूर्वक रहने में था। वह अपनी छोटी-सी दुनिया में खुश रहते थे। उनके व्यक्तित्व में पुराने समय की सादगी की झलक दिखाई देती थी। रेडियो सुनना, पुराने संगीत का आनंद लेना और समाचारों से जुड़े रहना उनके पसंदीदा समय बिताने के तरीकों में शामिल था। आज के डिजिटल दौर में जब मनोरंजन और सूचना के अनगिनत साधन उपलब्ध हैं, ऐसे समय में पुराने रेडियो से उनका लगाव उनकी पीढ़ी और उनकी जीवनशैली की याद दिलाता है।
रिश्तों को महत्व देने वाले इंसान थे अशरफ अली
अशरफ अली रिश्तों को महत्व देने वाले व्यक्ति थे। वह अपने परिवार के सदस्यों के साथ आत्मीयता से रहते थे। उनके लिए परिवार केवल साथ रहने वाले लोगों का समूह नहीं बल्कि भावनात्मक सहारा था। उन्होंने अपने बच्चों के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए जीवन का बड़ा हिस्सा गुजारा। कठिन परिस्थितियों में भी परिवार के प्रति उनका स्नेह कम नहीं हुआ। पत्नी के निधन के बाद जीवन में आया अकेलापन भी उन्होंने धैर्यपूर्वक सहा। परिवार और बच्चों के साथ उनका जुड़ाव उन्हें भावनात्मक ताकत देता रहा। उनके परिचित बताते हैं कि उनका स्वभाव शांत था। वह किसी विवाद में पड़ने के बजाय समझदारी और संयम से स्थिति को देखने में विश्वास रखते थे। यही वजह थी कि जो लोग उनके संपर्क में आए, उनके मन में उनके प्रति सम्मान की भावना बनी रही।
पिता की यादें अब परिवार का सहारा
किसी परिवार में बुजुर्ग व्यक्ति का निधन केवल एक सदस्य का जाना नहीं होता, बल्कि उसके साथ परिवार की कई पुरानी यादें भी जुड़ी होती हैं। अशरफ अली के जाने के बाद उनके परिवार के पास भी उनकी ऐसी ही अनगिनत यादें रह गई हैं। बेटे अरशद अली के लिए पिता की यादें आने वाले समय में भावनात्मक सहारा बनेंगी। पिता से हुई बातचीत, उनके साथ बिताया समय, उनकी सलाह, उनका शांत स्वभाव और परिवार के प्रति उनका स्नेह हमेशा याद रहेगा। माता-पिता की मौजूदगी का महत्व अक्सर उनके चले जाने के बाद और अधिक महसूस होता है। घर में बुजुर्ग की मौजूदगी परिवार को एक अलग तरह की सुरक्षा और भावनात्मक स्थिरता देती है। अशरफ अली के निधन के बाद उनके परिवार को इस खालीपन का सामना करना पड़ेगा।
समाज में सादगी की मिसाल छोड़ गए
अशरफ अली का जीवन भले ही सार्वजनिक रूप से बहुत अधिक चर्चित न रहा हो, लेकिन अपने परिवार और परिचितों के बीच उन्होंने सम्मानजनक स्थान बनाया। उन्होंने अपने जीवन को सादगी, संयम और पारिवारिक मूल्यों के साथ आगे बढ़ाया। आज जब समाज में सफलता को अक्सर भौतिक उपलब्धियों से जोड़कर देखा जाता है, ऐसे समय में अशरफ अली जैसे लोग याद दिलाते हैं कि शांत और साधारण जीवन भी अपने पीछे गहरी छाप छोड़ सकता है। परिवार के प्रति जिम्मेदारी, बच्चों के प्रति स्नेह, दूसरों की निजता का सम्मान और संतोष के साथ जीवन जीना उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषताएं रहीं। उनका निधन निश्चित रूप से परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनके द्वारा छोड़ी गई यादें परिवार के साथ हमेशा रहेंगी। उनके बच्चों और परिजनों के लिए यही यादें आने वाले समय में उनके व्यक्तित्व को जीवित रखेंगी।
शोक संवेदनाओं का सिलसिला जारी
अशरफ अली के निधन की जानकारी मिलने के बाद पत्रकारिता, सामाजिक और शैक्षिक क्षेत्र से जुड़े लोगों ने शोक व्यक्त किया। लोगों ने अरशद अली और उनके परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि इस दुख की घड़ी में वह परिवार के साथ हैं। लोगों ने दिवंगत के लिए दुआ-ए-मगफिरत करते हुए अल्लाह से उन्हें अपनी रहमत में जगह देने की प्रार्थना की। साथ ही परिजनों को यह दुख सहने की शक्ति प्रदान करने की दुआ की गई।परिवार के लिए इस समय सबसे बड़ी जरूरत अपनों के साथ और भावनात्मक सहयोग की है। रिश्तेदारों, मित्रों और परिचितों की मौजूदगी उन्हें इस कठिन समय में कुछ संबल दे सकती है। अशरफ अली अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका शांत स्वभाव, सादगी, पुराने रेडियो से लगाव, परिवार के प्रति स्नेह और बेटे के साथ उनका आत्मीय रिश्ता हमेशा याद किया जाएगा। उनके जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद यही रही कि उन्होंने बिना किसी दिखावे के अपने परिवार और अपने आसपास के लोगों के दिलों में जगह बनाई। उनका जाना एक परिवार के लिए पिता और बुजुर्ग का जाना है, लेकिन साथ ही यह उन लोगों के लिए भी एक भावुक क्षण है, जिन्होंने उन्हें करीब से जाना। अशरफ अली की यादें उनके परिवार और परिचितों के बीच लंबे समय तक जीवित रहेंगी।



