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नगर निगम कार्यकारिणी पर सियासी शतरंज: मुस्लिम पार्षदों की भाजपा विधायक दरबार में दस्तक!

नगर निगम कार्यकारिणी पर सियासी शतरंज: मुस्लिम पार्षदों की भाजपा विधायक दरबार में दस्तक!

2027 विधानसभा चुनाव की बिसात पर कार्यकारिणी सदस्यता का खेल, दावेदारों ने तेज की लॉबिंग….

विशेष रिपोर्ट -मो कलीम अंसारी

सहारनपुर नगर निगम बोर्ड की कार्यकारिणी के गठन से पहले शहर की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।कार्यकारिणी सदस्य बनने की दौड़ में विपक्षी मुस्लिम पार्षद सक्रिय हो गए हैं और सत्ता पक्ष के प्रभावशाली नेताओं से संपर्क साधकर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं।राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कई पार्षदों ने वरिष्ठ नेताओं और भाजपा विधायक के माध्यम से कार्यकारिणी में जगह बनाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, कार्यकारिणी सदस्यता को लेकर पर्दे के पीछे व्यापक राजनीतिक गतिविधियां चल रही हैं। वरिष्ठ मुस्लिम पार्षद भी आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए अपनी राजनीतिक रणनीति तैयार कर रहे हैं। माना जा रहा है कि कार्यकारिणी में अपने समर्थकों को स्थान दिलाकर वे भविष्य की चुनावी जमीन मजबूत करना चाहते हैं। चर्चाओं के केंद्र में एक वरिष्ठ पार्षद हैं, जिनके बारे में कहा जा रहा है कि वे अपने करीबी पार्षद महमूद को कार्यकारिणी में पहुंचाने के लिए सक्रिय हैं। राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि इसके लिए विभिन्न स्तरों पर बातचीत और संपर्क अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उधर, समाजवादी खेमे से जुड़े एक अन्य वरिष्ठ पार्षद भी अपने समर्थकों को कार्यकारिणी में शामिल कराने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक चर्चाओं में पार्षद अहमद मलिक और फजलुर रहमान के नाम संभावित दावेदारों के रूप में सामने आ रहे हैं। हालांकि अंतिम फैसला निर्वाचन प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्यकारिणी का यह चुनाव केवल नगर निगम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार 2027 के विधानसभा चुनाव से भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि विभिन्न गुट अपने-अपने समर्थकों को महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल नगर निगम की राजनीति में कार्यकारिणी सदस्यता को लेकर माहौल पूरी तरह गर्म है। दावेदारों की सक्रियता, नेताओं की बैठकों और अंदरखाने चल रही रणनीतियों ने राजनीतिक चर्चाओं को नई हवा दे दी है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्यकारिणी में आखिर किसे जगह मिलती है और कौन राजनीतिक बाजी मारने में सफल रहता है।

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