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बिजली-पानी-सड़क की बदहाली पर फूटा गुस्सा, अब कार्रवाई नहीं तो आंदोलन तय

सेहरामऊ में जनाक्रोश चरम पर:

बिजली-पानी-सड़क की बदहाली पर फूटा गुस्सा, अब कार्रवाई नहीं तो आंदोलन तय

पूरनपुर, पीलीभीत-129 विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत सेहरामऊ उत्तरी के सुल्तानपुर मंडल में जनसमस्याओं को लेकर हालात अब गंभीर होते जा रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच बिजली, पानी, सड़क और साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं की बदहाल स्थिति ने आमजन का जीवन संकट में डाल दिया है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि तत्काल और ठोस समाधान की मांग कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से चली आ रही समस्याएं अब असहनीय होती जा रही हैं। जर्जर सड़कें, जल निकासी की अव्यवस्था, गंदगी और सबसे बड़ी समस्या—अनियमित बिजली आपूर्ति—ने लोगों को परेशान कर रखा है। बार-बार शिकायतों के बावजूद समाधान की रफ्तार बेहद धीमी बनी हुई है, जिससे लोगों में गहरा असंतोष पनप रहा है।

जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठे सवाल,

सक्रियता बनाम निष्क्रियता पर बहस तेज

क्षेत्र में अब जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली भी चर्चा के केंद्र में आ गई है। स्थानीय स्तर पर लोगों की राय साफ तौर पर दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है। कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे हैं जो लगातार जनता के बीच रहकर समस्याएं सुन रहे हैं और अधिकारियों तक पहुंचाकर समाधान की कोशिश कर रहे हैं। इनके प्रयासों से कुछ स्थानों पर राहत भी मिली है। लेकिन दूसरी ओर, कई जनप्रतिनिधियों की निष्क्रियता को लेकर लोगों में नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ नेता केवल औपचारिकता निभा रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। हालांकि किसी का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं।

बिजली संकट बना सबसे बड़ा मुद्दा, हरीपुर पावर हाउस पर गंभीर आरोप

आज के समय में बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवनरेखा बन चुकी है। लेकिन सेहरामऊ क्षेत्र में बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आ रही है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन का उपकरण मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत जिला पीलीभीत का एक ग्रामीण क्षेत्र बिजली समस्या से लगातार जूझ रहा है जिसे अधिकांश पूरनपुर विकासखंड के 94 गांव के नाम से जाना जाता है ग्रामीणों का आरोप है कि हरीपुर पावर हाउस से जुड़े उपभोक्ताओं को बार-बार बिना सूचना बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। ड्यूटी पर तैनात ऑपरेटरों की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत करने पर कभी “लाइन ट्रिपिंग” तो कभी “मौसम खराब” और कभी ‘तेज हवा” का हवाला दिया जाता है। जबकि नियम स्पष्ट है— यदि 11 केवी लाइन ट्रिप होती है, तो 5–10 मिनट में दोबारा ट्राई लिया जाना चाहिए।लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां अक्सर 1 घंटे या उससे अधिक समय बाद सप्लाई बहाल की जाती है, जबकि बाद में लाइन बिना किसी समस्या के चालू हो जाती है। यह स्थिति न केवल लापरवाही की ओर इशारा करती है, बल्कि सिस्टम पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

जनता का सब्र जवाब दे रहा, आंदोलन की चेतावनी

लगातार उपेक्षा से अब ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। स्थानीय लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि—

यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो
पावर हाउस का घेराव
जोरदार धरना-प्रदर्शन
और उच्च अधिकारियों से शिकायत
जैसे कदम उठाए जाएंगे।

समाधान का रास्ता: जवाबदेही और समन्वय जरूरी

विशेषज्ञों और स्थानीय जागरूक नागरिकों का मानना है कि हालात सुधारने के लिए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर चिन्हित कर समयबद्ध कार्ययोजना बनाई जाए, तभी स्थिति में सुधार संभव है।

अब वादों का नहीं, परिणाम का समय

सेहरामऊ की मौजूदा स्थिति साफ संकेत दे रही है कि जनता अब खामोश नहीं रहने वाली। अब केवल घोषणाएं नहीं, जमीन पर बदलाव चाहिए। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि कौन जनप्रतिनिधि जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है— और कौन सवालों के घेरे में आता है।

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