मलाईदार पोस्टिंग का मोह 75 विकेट गिरे, पर फतेहपुर के कुछ सिपाही’ खिलाड़ी क्रीज छोड़ने को तैयार नहीं,

मलाईदार पोस्टिंग का मोह 75 विकेट गिरे, पर फतेहपुर के कुछ सिपाही’ खिलाड़ी क्रीज छोड़ने को तैयार नहीं,
सहारनपुर में ‘सिस्टम’ भारी या ‘सिपाही’ कप्तान के आदेश को फतेहपुर थाने में तैनात सिपाहीयो ने दिखाया ठेंगा…
संवाददाता -मो कलीम अंसारी
सहारनपुर जनपद में पुलिसिंग व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिनंदन सिंह द्वारा शुरू की गई ‘क्लीन-अप’ मुहिम अब सिस्टम के भीतर ही चुनौती का सामना कर रही है। एसएसपी के कड़े रुख के बाद भी थाना फतेहपुर और मिर्जापुर में तैनात कुछ पुलिसकर्मी आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। बताया जा रहा है कि मिर्जापुर थाने में एक सिपाही को साढ़े तीन साल हो गए जो नियम विरुद्ध है। हाल ही में सहारनपुर एसएसपी ने विभाग के भीतर मलाईदार थानों में जमे और भ्रष्टाचार की शिकायतों के घेरे में आए पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक गोपनीय जांच बैठाई थी, इस जांच के आधार पर 75 पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया गया और जनहित में उन्हें तत्काल प्रभाव से थानों से हटाकर पुलिस लाइन भेजे जाने के आदेश जारी किए। कप्तान की इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया था और इसे ‘ठेकेदारी प्रथा’ को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था, हैरानी की बात यह है कि एसएसपी के स्पष्ट आदेश के बावजूद थाना फतेहपुर से अभी तक तीन पुलिसकर्मियों की रवानगी नहीं की गई है, तबादला सूची में नाम होने के बावजूद उन सिपाहियों की रवानगी न करना प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
सूत्रों का दावा है कि ये पुलिसकर्मी अपनी रवानगी रुकवाने के लिए राजनीतिक गलियारों की शरण ले रहे हैं या सांठ-गांठ का कोई बड़ा खेल चल रहा है। आखि़र किस जरिए से कप्तान के आदेश को ठंडे बस्ते में डालने की पुरजोर कोशिश की जा रही है। सवाल यह है कि क्या ये सिपाही सिस्टम से भी ऊपर हैं, या फिर थाना स्तर पर ही इन्हें “संरक्षण” दिया जा रहा है। एसएसपी सहारनपुर अभिनन्दन सिंह अपनी सख्त और स्पष्ट कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिया है कि महकमे में केवल कानून और अनुशासन ही सर्वोपरि होगा, किसी भी प्रकार का दबाव या पैरवी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, “यदि कप्तान के स्थानांतरण आदेश का पालन तत्काल नहीं होता है, तो यह सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। ऐसे में संबंधित थाना प्रभारी की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए, क्या रसूखदार सिपाहियों के आगे कप्तान का आदेश बौना साबित हो रहा है। थाना प्रभारी ने इन पुलिसकर्मियों को अब तक कार्यमुक्त क्यों नहीं किया, क्या प्रशासन इन पर सख्त कार्रवाई कर अनुशासन की मिसाल पेश करेगा अब पूरे जनपद की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करने वाला सिस्टम इन ‘जमे हुए’ सिपाहियों को पुलिस लाइन का रास्ता दिखाता है या फिर रसूख या किसी सांठ-गांठ के आगे आदेश दम तोड़ देगा।



