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“हर घर जल योजना पर सवाल: मकान तक पानी ले जाने के लिए 60% दिव्यांग से नाली खुदवाने की शर्त, ठेकेदार की मनमानी उजागर” | SvasJsNews

ब्यूरो रिपोर्ट

“घर तक पानी चाहिए तो खुद नाली खोदो”: ठेकेदार की मनमानी पर भड़का विवाद | SvasJsNews

पूरनपुर, पीलीभीत।
केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर जल’ योजना, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जनपद पीलीभीत के विकासखंड पूरनपुर की ग्राम पंचायत जगतपुर में इस योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर अनियमितताओं और ठेकेदार की कथित मनमानी का मामला सामने आया है। एक ग्रामीण द्वारा लगाए गए आरोपों ने न केवल योजना की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली पर भी गहरे सवाल उठाए हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार, गांव में जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन और टंकी स्थापना का कार्य किया जा रहा है। इसी दौरान एक ग्रामीण ने आरोप लगाया कि उसकी सहमति के बिना ही संस्था की भूमि के किनारे सड़क पर बनी नाली के ऊपर जबरन पानी की टंकी स्थापित कर दी गई। ग्रामीण का कहना है कि उसने पहले ही संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से अपने घर के समीप कनेक्शन देने का अनुरोध किया था, लेकिन उसकी मांग को नजरअंदाज कर दिया गया।मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब ग्रामीण ने इस पर आपत्ति जताई। आरोप है कि मौके पर मौजूद कर्मचारियों और ठेकेदार ने न केवल उसकी बात को अनसुना किया, बल्कि अभद्र व्यवहार भी किया। पीड़ित के अनुसार, ठेकेदार ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया कि यदि उसे घर तक कनेक्शन चाहिए तो उसे स्वयं नाली खुदवाकर पाइप डलवानी होगी, अन्यथा सड़क किनारे बनी नाली के ऊपर से ही पानी लेना पड़ेगा।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि शिकायतकर्ता लगभग 60 प्रतिशत दिव्यांग है, जिसके बावजूद उससे इस प्रकार की अपेक्षा की गई। इस व्यवहार को ग्रामीण ने न केवल अमानवीय बल्कि सरकारी योजनाओं के दिशा-निर्देशों के पूर्णतः विपरीत बताया है। उसका कहना है कि सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का उद्देश्य आमजन को सुविधा प्रदान करना है, न कि उन्हें अतिरिक्त बोझ उठाने के लिए मजबूर करना।ग्रामीण ने यह भी आरोप लगाया है कि संस्था की भूमि पर बिना अनुमति टंकी स्थापित करना पूरी तरह अवैध है। इससे भविष्य में भूमि विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे न केवल संबंधित व्यक्ति बल्कि संस्था को भी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार की कार्रवाई से यह स्पष्ट होता है कि कार्य में न तो पारदर्शिता बरती जा रही है और न ही स्थानीय हितों का ध्यान रखा जा रहा है।मामले में यह भी सामने आया है कि शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित विभाग इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और योजना की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इसी प्रकार लापरवाही और मनमानी जारी रही तो सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी।पीड़ित ग्रामीण ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री पोर्टल पर दर्ज कराई है। साथ ही जिलाधिकारी से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, उसने अपने घर तक विधिवत जल कनेक्शन उपलब्ध कराने की भी मांग की है, ताकि उसे मूलभूत सुविधा से वंचित न रहना पड़े।


यह मामला केवल एक व्यक्ति की समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में किस प्रकार की खामियां मौजूद हैं। यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इससे आमजन का सरकार की योजनाओं से विश्वास उठ सकता है।अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी प्राथमिकता देता है और क्या पीड़ित को न्याय मिल पाता है या फिर यह मामला भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। SvasJsNews इस पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए है और आगे की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

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