रिश्वतखोर तंत्र के आगे टूटी विधवा, आत्मदाह की चेतावनी
पंकज कुमार सिंह , ब्यूरो रिपोर्ट

रिश्वतखोर तंत्र के आगे टूटी विधवा, आत्मदाह की चेतावनी
SvasJsNews
लखीमपुर खीरी के पलिया कलां क्षेत्र से एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्ट तंत्र के चलते एक विधवा महिला न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्राम नगला की निवासी संजीदा बेगम अपनी ही पुश्तैनी जमीन पर कब्जा दिलाने की मांग को लेकर लंबे समय से अधिकारियों के चक्कर काट रही हैं, लेकिन उन्हें हर स्तर पर निराशा ही हाथ लग रही है। पीड़िता के अनुसार, उनकी लगभग 30 डिसमिल भूमि पर गांव के ही कुछ दबंगों—साहिद और गुड्डू—द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया है। जब भी वह अपने हक की मांग करती हैं, तो उन्हें न केवल गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है, बल्कि जान से मारने की धमकियां भी दी जाती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस पूरे प्रकरण में राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी—लेखपाल और कानूनगो—पूरी तरह से निष्क्रिय और उदासीन नजर आ रहे हैं। बताया जा रहा है कि उपजिलाधिकारी द्वारा जमीन की पैमाइश के स्पष्ट आदेश दिए जाने के बावजूद महीनों तक कार्रवाई टाल दी गई। 24 जून 2025 को गठित टीम ने फसल का बहाना बनाकर काम को टाल दिया, जबकि 4 अप्रैल 2026 को मौके पर पहुंची टीम ने भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए पीड़िता को खुद कब्जा लेने की सलाह दे डाली। इस रवैये ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संजीदा बेगम ने आरोप लगाया है कि बिना रिश्वत दिए इस भ्रष्ट तंत्र में न्याय मिलना लगभग असंभव हो गया है। उनका कहना है कि दबंगों को अधिकारियों का मौन समर्थन प्राप्त है, जिससे उनका हौसला और बढ़ता जा रहा है। अब हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पीड़िता ने प्रशासन को खुली चेतावनी दे दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि उनकी भूमि गाटा संख्या 1003 पर उन्हें शीघ्र कब्जा नहीं दिलाया गया, तो वह अपने पूरे परिवार के साथ आत्मदाह करने के लिए मजबूर होंगी। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल मचनी चाहिए, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। यह मामला न केवल एक महिला के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे सिस्टम की संवेदनहीनता और भ्रष्टाचार की पोल भी खोलता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन समय रहते जागता है या एक और दर्दनाक घटना का इंतजार करता है।



