गोमती तट बंडा में हवन-पूजन, विचार गोष्ठी और भव्य आरती संपन्न
विशेष रिपोर्ट-दीपक सिंह

गोमती तट बंडा में हवन-पूजन, विचार गोष्ठी और भव्य आरती संपन्न
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बंडा (शाहजहाँपुर)। माँ गोमती के पावन तट पर आस्था, संस्कृति और जनजागरण का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब गोमती दर्शन संस्था के तत्वावधान में बंडा स्थित श्री सुनासीरनाथ बाबा मंदिर परिसर में “गोमती दर्शन यात्रा” के अंतर्गत दिनभर विविध धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक वातावरण को जीवंत किया, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और नदी स्वच्छता के प्रति जनमानस को जागरूक करने का सशक्त संदेश भी दिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकालीन वेला में माँ गोमती के तट पर स्थित मंदिर परिसर में श्रद्धा और भक्ति के साथ हुई। ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर श्री विजयकांत मिश्रा, नगर पंचायत बंडा के अधिशासी अधिकारी एवं अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में जनजागरण अभियान चलाया गया। इस दौरान उपस्थित जनसमूह को माँ गोमती के संरक्षण, संवर्धन एवं स्वच्छता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि समाज संगठित होकर प्रयास करे तो नदियों को पुनः निर्मल और अविरल बनाया जा सकता है।

दोपहर के समय कार्यक्रम ने एक और आध्यात्मिक ऊंचाई प्राप्त की जब श्री सुनासीरनाथ बाबा मंदिर परिसर में महागोमती हवन-पूजन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सुश्री चित्रा निरवाल विशेष रूप से उपस्थित रहीं। उन्होंने वैदिक विधि-विधान के साथ हवन-पूजन में भाग लिया और माँ गोमती को स्वच्छ, निर्मल एवं अविरल बनाए रखने का संकल्प दोहराया। हवन-पूजन का मुख्य उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों की शुद्धता और समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश भी दिया गया।

हवन-पूजन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं और गणमान्य नागरिकों ने सामूहिक रूप से यह संकल्प लिया कि वे माँ गोमती के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और अपने-अपने स्तर पर स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाएंगे। इस अवसर पर श्री संजय अवस्थी, श्री महेश कुमार गगरी सहित कई प्रमुख नागरिकों की सक्रिय सहभागिता रही।कार्यक्रम के दौरान प्रशासनिक सक्रियता भी देखने को मिली। उपजिलाधिकारी द्वारा माँ गोमती तट का निरीक्षण किया गया, जिसमें उन्होंने तट की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान स्थानीय नागरिकों द्वारा तट पर दो घाटों के निर्माण की मांग रखी गई, जिसे एसडीएम ने उचित ठहराते हुए संबंधित विभागों को शीघ्र कार्यवाही के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने नदी में कूड़ा-कचरा डालने से रोकने के लिए सूचना पट्ट (साइन बोर्ड) लगाने की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और नदी की स्वच्छता बनी रहे।

शाम के समय कार्यक्रम ने एक बौद्धिक और सांस्कृतिक स्वरूप ग्रहण किया, जब मंदिर परिसर में भव्य विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विद्वानों, संत-महात्माओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पर्यावरण संरक्षण गतिविधि, पश्चिम उत्तर प्रदेश के संयोजक श्री रणवीर सिंह उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता के रूप में महंत श्री हनुमंत नाथ जी तथा विशेष अतिथि के रूप में बीडीओ श्री विजयकांत मिश्रा ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन कुशलतापूर्वक श्री राकेश कुमार पाण्डे द्वारा किया गया।गोष्ठी के दौरान संस्था के संयोजक श्री अनुराग पाण्डे ने गोमती दर्शन यात्रा के अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि माँ गोमती के संरक्षण के लिए जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है और इसके लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।

संस्था की अध्यक्ष श्रीमती श्वेता सिंह ने माँ गोमती के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि यह नदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था की प्रतीक है, जिसे संरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है।मुख्य अतिथि श्री रणवीर सिंह ने अपने संबोधन में माँ गोमती को “आदि गंगा” की संज्ञा देते हुए कहा कि यह नदी अनादि काल से जनमानस का पालन-पोषण करती आई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी यह नदी कई नगरों को पेयजल उपलब्ध कराती है, इसलिए इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को आगे आना होगा। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण को राष्ट्रहित से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्य वक्ता महंत श्री हनुमंत नाथ जी ने माँ गोमती के आध्यात्मिक स्वरूप की व्याख्या करते हुए कहा कि यह नदी केवल भौतिक नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का भी स्रोत है। उन्होंने इसके नाम और महत्व को विस्तार से समझाते हुए श्रद्धालुओं को इसके प्रति आस्था और जिम्मेदारी बनाए रखने का आह्वान किया।विशेष अतिथि श्री विजयकांत मिश्रा ने भी अपने संबोधन में माँ गोमती को स्वच्छ और अविरल बनाए रखने के लिए प्रशासन और समाज के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता बताई। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रशासन इस दिशा में हर संभव कदम उठाएगा।कार्यक्रम के दौरान एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में जिला अधिकारी के माध्यम से माननीय मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें माँ गोमती के संरक्षण से संबंधित विभिन्न मांगें शामिल थीं। यह ज्ञापन बीडीओ श्री विजयकांत मिश्रा को सौंपा गया, जिन्होंने इसे जिलाधिकारी तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।

दिनभर चले इस भव्य आयोजन का समापन माँ गोमती तट पर भव्य आरती के साथ हुआ। सायंकालीन आरती के समय वातावरण पूर्णतः भक्तिमय हो गया, जब सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक साथ माँ गोमती की आराधना की। दीपों की रोशनी और भक्ति गीतों के मधुर स्वर ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। प्रमुख रूप से श्री गिरेन्द्र कुमार मिश्र, श्री सत्यधर मिश्रा, श्री सर्वेश शुक्ला, श्री अवधेश कुमार शुक्ला, श्री विनय पटेल, श्री संजय अवस्थी, श्री राजदीप सिंह सहित कई प्रतिष्ठित नागरिक मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त श्री अमिताभ पांडे, पंडित गोपाल नारायण शुक्ला, श्री ललित मिश्रा, श्री अरविंद पांडे, श्री अंकुर पांडे, श्री हिमांशु मिश्रा, श्री अम्बीश शर्मा, श्री रजत तिवारी, श्री ब्रिजेश शुक्ला सहित अनेक श्रद्धालुओं एवं क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम के अंत में गोमती दर्शन संस्था के संयोजक श्री अनुराग पाण्डे एवं अध्यक्ष श्रीमती श्वेता सिंह ने सभी अतिथियों, प्रशासनिक अधिकारियों एवं उपस्थित जनसमूह का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के आयोजन समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनते हैं और भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और सामूहिक उत्तरदायित्व का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत कर गया। गोमती दर्शन यात्रा के माध्यम से दिया गया यह संदेश निश्चित रूप से आने वाले समय में जनमानस को नदी संरक्षण के प्रति प्रेरित करेगा।





