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गोमती दर्शन यात्रा का भव्य शुभारंभ, जन-जागरण संग निकली पदयात्रा

गोमती दर्शन यात्रा का भव्य शुभारंभ, जन-जागरण संग निकली पदयात्रा

SvasJsNews

पीलीभीत। आस्था, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण के अद्भुत संगम के रूप में आज गोमती दर्शन यात्रा का भव्य शुभारंभ माँ गोमती के पावन उद्गम स्थल से विधिवत पूजन-अर्चन के साथ किया गया। प्रातःकालीन बेला में आयोजित इस दिव्य कार्यक्रम में श्रद्धा और उत्साह का अनूठा दृश्य देखने को मिला, जहाँ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच माँ गोमती एवं ध्वज पूजन संपन्न कराया गया। पूजन कार्यक्रम का संचालन पंडित गोपाल नारायण शुक्ला जी ने विधिविधान से कराया, जिसमें सभी यात्रियों और ध्वजों का तिलक कर यात्रा के मंगलमय आरंभ की कामना की गई।


इस पावन अवसर पर संस्था के संयोजक एडवोकेट अनुराग पांडे एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह के नेतृत्व में गोमती दर्शन पदयात्रा का शुभारंभ हुआ। यात्रा ने सबसे पहले उद्गम स्थल की परिक्रमा कर माँ गोमती के प्रति श्रद्धा अर्पित की और इसके पश्चात कठिन एवं दुर्गम मार्गों से होते हुए अपने अगले पड़ाव की ओर अग्रसर हुई।

यात्रा के दौरान एक अत्यंत मार्मिक और चिंतनीय दृश्य तब सामने आया, जब यात्रियों को माँ गोमती के बेस फ्लो क्षेत्र में जल का पूर्ण अभाव देखने को मिला। कई किलोमीटर तक सूखी पड़ी नदी के बीच पैदल चलते हुए यात्रियों ने नदी की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि समाज को एक बड़ा संदेश भी दे रहा था कि यदि समय रहते नदी संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

आगे बढ़ते हुए यात्रा पूरनपुर नगर पहुँची, जहाँ नगर भ्रमण के दौरान स्थानीय लोगों ने उत्साहपूर्वक यात्रियों का स्वागत किया। इसके पश्चात यात्रा त्रिवेणी घाट होते हुए एकोत्तरनाथ मंदिर की ओर बढ़ी और अंत में साहजहापुर स्थित सोनासिरनाथ बाबा मंदिर में दर्शन कर विश्राम किया गया।

त्रिवेणी घाट पर यात्रा का भव्य स्वागत श्री लक्ष्मण वर्मा एवं श्री सतीश मिश्रा द्वारा किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यात्रा के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और माँ गोमती के संरक्षण के इस अभियान में सहभागी बनने का संकल्प लिया।

इसके अतिरिक्त प्रसादपुर गौशाला में भी यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जहाँ श्री अनंत राम पांड्या एवं श्री जगबीर सिंह ने सभी यात्रियों का सम्मान करते हुए आतिथ्य प्रदान किया। इस स्वागत ने यात्रा के उत्साह को और अधिक ऊर्जा प्रदान की।

पूरे मार्ग में यात्रियों द्वारा लगाए गए जोशीले नारे जन-जागरण का केंद्र बने रहे।
“गोमती मैया को पानी दो!”
“गोमती मैया में कूड़ा डालना बंद करो!”
“गोमती मैया को राजनदी का दर्जा दो!”

इन नारों के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया, जिससे लोगों में नदी संरक्षण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो सके।

संयोजक अनुराग पांडे ने विभिन्न स्थानों पर ग्रामवासियों को संबोधित करते हुए माँ गोमती के संरक्षण एवं पुनर्जीवन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि जन-जागरण का अभियान है, जिसका उद्देश्य समाज को अपनी प्राकृतिक धरोहर के प्रति जागरूक करना है।

त्रिवेणी घाट स्थित मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में अनुराग पांडे एवं श्वेता सिंह ने अपने विचार रखते हुए माँ गोमती के संरक्षण हेतु आवश्यक कदमों पर जोर दिया। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, किंतु सिंचाई एवं राजस्व विभाग के बीच समन्वय की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं।


उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि संबंधित विभाग आपसी तालमेल के साथ कार्य करें, तो माँ गोमती को पुनः जलयुक्त एवं जीवनदायिनी स्वरूप में स्थापित किया जा सकता है। माँ गोमती, जो पीलीभीत से लेकर गाजीपुर तक प्रवाहित होती हैं, प्रदेश की जीवनरेखा के रूप में जानी जाती हैं। यह नदी न केवल रुहेलखंड, मध्य एवं पूर्वी उत्तर प्रदेश के विशाल भूभाग को सिंचित करती है, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है।

अतः माँ गोमती के संरक्षण एवं पुनर्जीवन हेतु सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया गया, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी इस अमूल्य धरोहर का लाभ मिल सके।

इस अवसर पर यात्रा में पंकज शुक्ला, ललित मिश्रा, अंकुर पाण्डेय, अरविंद पाण्डेय, राजेश शुक्ला, अरविंद जायसवाल (तेजू), हरिओम दीक्षित, शिवम् अवस्थी, रजत तिवारी, अमित गुप्ता, अवधेश वर्मा, व्रिजेश शुक्ला, अमिताभ पाण्डेय, तीर्थराज यादव, पुनीत कुमार, राज सोनकर, सुजीत मौर्या, हिमांशु मिश्रा एवं मोहम्मद असलम सहित अनेक गोमती सेवक, गणमान्य नागरिक एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

यह यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक बनी, बल्कि समाज को जागरूक करने का एक सशक्त माध्यम भी सिद्ध हो रही है, जो आने वाले समय में एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकती है।

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