माँ गोमती के आशीर्वाद से शुरू हुई पावन पदयात्रा, आस्था और जनजागरण का महाअभियान बना जनआंदोलन
स्वच्छता, संरक्षण और सनातन संस्कृति का संदेश लेकर आगे बढ़ रही गोमती दर्शन यात्रा

गोमती दर्शन यात्रा को लेकर व्यापक तैयारी, संस्कृति और आस्था का संगम, आज से यात्रा प्रारंभ
SvasJsNews
पीलीभीत – भारतीय संस्कृति की सनातन परंपराओं, धार्मिक आस्थाओं और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को एक सूत्र में पिरोती “गोमती दर्शन यात्रा” आज से विधिवत प्रारंभ हो गई है। इस पावन आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में भक्ति, उत्साह और सामाजिक जागरूकता का अनूठा वातावरण देखने को मिल रहा है। यात्रा न केवल धार्मिक श्रद्धा का प्रतीक है, बल्कि माँ गोमती की स्वच्छता, संरक्षण और जनजागरण का एक व्यापक अभियान बनकर उभर रही है। इस संबंध में जानकारी देते हुए गोमती दर्शन की अध्यक्ष श्वेता सिंह ने हमारे सहयोगी संवाददाता से बातचीत में बताया कि यह यात्रा भारतीय संस्कृति के मूल भाव—“प्रकृति पूजा और संरक्षण”—को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि माँ गोमती केवल एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था, परंपरा और जीवनदायिनी धारा का प्रतीक हैं, जिनकी स्वच्छता और संरक्षण हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यात्रा का शुभारंभ 27–28 मार्च को पीलीभीत में आगमन एवं रात्रि विश्राम के साथ हुआ, जहां विधि-विधान से पूजन, हवन, स्वच्छता अभियान और सायंकालीन भव्य आरती का आयोजन किया गया। इसके पश्चात आज से पदयात्रा प्रारंभ होकर श्रद्धालुओं के साथ विभिन्न पावन स्थलों की ओर अग्रसर हो चुकी है। यात्रा का पहला पड़ाव शाहजहाँपुर निर्धारित किया गया है, जहां 29 एवं 30 मार्च को पूजन एवं रात्रि विश्राम कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसके बाद 31 मार्च को यात्रा लखीमपुर खीरी स्थित प्रसिद्ध टेढ़ेनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां 1 अप्रैल को विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। आगे 2 अप्रैल को यह यात्रा पवित्र नैमिषारण्य धाम (सीतापुर) पहुंचेगी, जहां 3 अप्रैल को पूजन, स्वच्छता अभियान और भव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। 4 अप्रैल को यात्रा चंद्रिका देवी मंदिर की ओर प्रस्थान करेगी, जहां 5 अप्रैल की प्रातःकालीन बेला में पूजन, हवन और स्वच्छता अभियान संपन्न होगा। उसी दिन सायंकाल लखनऊ के कुड़ियाघाट पर इस आध्यात्मिक यात्रा का भव्य एवं ऐतिहासिक समापन किया जाएगा।

यात्रा का नेतृत्व संयोजक अनुराग पांडे एवं अध्यक्ष श्वेता सिंह के मार्गदर्शन में किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से भावपूर्ण अपील करते हुए कहा कि अधिक से अधिक लोग इस पावन यात्रा में शामिल होकर माँ गोमती की सेवा, स्वच्छता और संरक्षण के इस महाअभियान को सफल बनाएं। निश्चित रूप से यह यात्रा भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी का जीवंत उदाहरण बनकर समाज को एक नई दिशा देने का कार्य कर रही है, जिसमें जनभागीदारी ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति सिद्ध हो रही है।




