आस्था के पथ पर ‘रोडवेज’ का रोड़ा: लाखों श्रद्धालु परेशान, निजी बसों के भरोसे यात्रा

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आस्था के पथ पर ‘रोडवेज’ का रोड़ा: लाखों श्रद्धालु परेशान, निजी बसों के भरोसे यात्रा
📍 भीलवाड़ा (राजस्थान) | विशेष रिपोर्ट – सत्यनारायण सेन गुरला | SvasJsNews
मेवाड़ के प्रसिद्ध कृष्ण धाम सांवरिया सेठ के दर्शन के लिए हर दिन हजारों और विशेष अवसरों पर लाखों श्रद्धालु इस मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इतना महत्वपूर्ण धार्मिक मार्ग आज भी सरकारी रोडवेज बस सेवा से वंचित है। भीलवाड़ा से वाया गुरला, कारोई, पहुना, राशमी, मातृकुंडिया, शनि धाम, कपासन और भादसोड़ा होते हुए सांवरिया जी तक जाने वाला यह मार्ग आस्था, ज्योतिष और पर्यटन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, फिर भी परिवहन व्यवस्था यहां पूरी तरह उपेक्षित है।
👉 इस मार्ग पर स्थित गुरला को “भीलवाड़ा का कश्मीर” कहा जाता है, कारोई अपनी ज्योतिषीय गणनाओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। मातृकुंडिया धाम और शनि देव मंदिर (शनि धाम) जैसे स्थल पश्चिमी राजस्थान सहित दूर-दराज के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र हैं। कपासन की हजरत दीवाना शाह दरगाह धार्मिक सौहार्द का प्रतीक है, जबकि भादसोड़ा सांवरिया धाम का प्रमुख प्रवेश द्वार माना जाता है। इतने महत्वपूर्ण स्थलों के बावजूद रोडवेज बसों का संचालन न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है।

👉 रोडवेज सेवा के अभाव का सीधा लाभ निजी बस संचालक उठा रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि निजी बसों में निर्धारित किराए से अधिक वसूली की जाती है, क्षमता से अधिक सवारियां भरी जाती हैं और यात्रा समय भी अनिश्चित रहता है। कई बार यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
👉 सरकार द्वारा महिलाओं को किराए में 50 प्रतिशत छूट और बुजुर्गों को दी जाने वाली रियायतें भी इस मार्ग पर बेअसर साबित हो रही हैं, क्योंकि यहां रोडवेज बसें ही उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को मजबूरी में निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ता है, जो महंगा और असुरक्षित दोनों है।
👉 स्थानीय लोगों का कहना है कि कोरोना काल से पहले इस रूट पर रोडवेज बसें संचालित होती थीं, जिससे यात्रियों को काफी सुविधा मिलती थी। लेकिन महामारी के बाद यह सेवा बंद कर दी गई और आज तक दोबारा शुरू नहीं की गई। चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा रोडवेज डिपो पर इस रूट की अनदेखी के आरोप भी लगातार लग रहे हैं, जबकि इस मार्ग का बड़ा हिस्सा चित्तौड़गढ़ जिले में आता है।
श्रद्धालुओं और ग्रामीणों का दर्द:
“सरकार को केवल चुनाव के समय आस्था याद आती है, लेकिन सुविधा देने के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिलता है। जब लाखों लोग इस मार्ग से गुजरते हैं, तो रोडवेज बस सेवा क्यों नहीं?”
जनता की मांग – SvasJsNews के माध्यम से
क्षेत्र के ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने परिवहन विभाग से मांग की है कि भीलवाड़ा से सांवरिया सेठ वाया गुरला–कारोई–पहुना–राशमी–कपासन मार्ग पर तुरंत 2 से 3 नई रोडवेज बस सेवाएं शुरू की जाएं। साथ ही ऐसी व्यवस्था हो कि श्रद्धालु सुबह बस से जाकर दिन में दर्शन कर शाम तक वापस लौट सकें। इसके अलावा एकादशी, अमावस्या और प्रमुख धार्मिक आयोजनों के दौरान विशेष शटल बसें भी चलाई जाएं।
SvasJsNews निष्कर्ष:
“आस्था के इस महत्वपूर्ण मार्ग पर सुविधा का अभाव केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ अन्याय है। अब समय आ गया है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करे, ताकि ‘आस्था का सफर’ सुरक्षित और सुगम बन सके।”



