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राजनगर उनडी में गूंजे जयकारे, सुमतिनाथ-वासुपूज्य मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यता संग सम्पन्न

राजनगर उनडी में गूंजे जयकारे, सुमतिनाथ-वासुपूज्य मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव भव्यता संग सम्पन्न

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राजस्थान ब्यूरो | समरथाराम सुंदेशा की विशेष खबर

राजस्थान की पावन मरुधरा पर स्थित राजनगर उनडी एक बार फिर आध्यात्मिक आस्था के रंग में सराबोर नजर आया। यहां नवनिर्मित शिखरबद्ध जिनालय में भगवान सुमतिनाथ परमात्मा एवं वासुपूज्य स्वामी मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के उपलक्ष्य में आयोजित अष्टान्हिका महोत्सव ने पूरे क्षेत्र को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन मधुरतन अपूर्व शासनप्रभावक जैनाचार्य रत्नाकरसूरीश्वर महाराज एवं श्रूपोसक जैनाचार्य रत्नसंचयसूरीश्वर महाराज की पावन निश्रा में संपन्न हो रहा है।

महोत्सव की छठी रात्रि विशेष आकर्षण का केंद्र रही, जब मंदिर की ध्वजा एवं इंडा चढ़ावे की बोलियां श्रद्धालुओं के उत्साह के बीच लगीं। वातावरण ‘स्वामी महावीर के जयकारों’ से गुंजायमान हो उठा। दिनभर विविध धार्मिक अनुष्ठानों, विधान एवं पूजन कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भाग लेकर पुण्य लाभ अर्जित किया।


सातवें दिन अयोध्या नगरी की उपमा पाए राजनगर उनडी में भव्य वरघोड़ा निकाला गया। रथगाड़ी में सुसज्जित प्रतिमाएं, आगे बैंड-बाजा, ढोल-नगाड़े और शहनाई की मधुर धुन—इन सबने शोभायात्रा को दिव्य स्वरूप प्रदान किया। सैकड़ों की संख्या में श्रावक-श्राविकाएं मंत्रमुग्ध होकर भक्ति में झूम उठे। पूरा नगर जैसे धर्ममय उत्सव का साक्षी बन गया। वरघोड़ा बहुमान पंडाल कक्ष में पहुंचा, जहां लाभार्थी परिवारों का सम्मान किया गया। आयोजन में मारवाड़ी, गुजराती और तमिलनाडु से आए कलाकारों ने पारंपरिक ‘गैर’ नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियां दीं। सांस्कृतिक विविधता और धार्मिक आस्था का यह अद्भुत संगम उपस्थित जनसमूह के लिए अविस्मरणीय बन गया।कार्यक्रम का एक रोचक और आकर्षक दृश्य तब देखने को मिला जब शोभायात्रा में शामिल घोड़ी भी बैंड की धुन पर थिरकती नजर आई। यह दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आश्चर्य और आनंद का केंद्र बन गया। पूरे महोत्सव ने यह सिद्ध कर दिया कि राजनगर उनडी केवल भौगोलिक पहचान नहीं, बल्कि आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का सशक्त प्रतीक है। प्राण प्रतिष्ठा का यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज को एक सूत्र में बांधने का प्रेरक अवसर भी बना।

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