खाकी का साहस: जलमग्न गड्ढे में डूबते मासूम की बची जान SvasJsNews

खाकी का साहस: जलमग्न गड्ढे में डूबते मासूम की बची जान
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कासगंज, 11 फरवरी 2026। मानवता और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल पेश करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के एक रिक्रूट आरक्षी ने अपनी जान की परवाह किए बिना गहरे पानी से भरे गड्ढे में डूब रहे पांच वर्षीय मासूम को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यह साहसिक घटना कासगंज बाइपास तिराहा, एटा रोड स्थित सौरभ होटल के समीप की है, जहां निर्माण कार्य के कारण खुदा गड्ढा पानी से लबालब भरा हुआ था।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, खेलते-खेलते बच्चा अचानक संतुलन खो बैठा और सीधे पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरा। मासूम की चीख-पुकार सुनते ही आसपास अफरा-तफरी मच गई। भारी कीचड़ और गहराई के चलते मौके पर मौजूद लोग चाहकर भी पानी में उतरने का साहस नहीं जुटा पा रहे थे। तभी गश्त पर तैनात बाह्य व्यवहारिक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रिक्रूट आरक्षी गौरव कुमार (चेस्ट नंबर 85, टोली नंबर 03) की नजर भीड़ पर पड़ी।
स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए गौरव कुमार ने बिना एक पल गंवाए वर्दी समेत गड्ढे में छलांग लगा दी। कीचड़ और फिसलन के बीच कड़ी मशक्कत कर उन्होंने बच्चे को पकड़कर बाहर निकाला। उस समय बच्चा अचेत अवस्था में था और उसके पेट में पानी चला गया था। आरक्षी ने तत्काल प्राथमिक उपचार देते हुए सीपीआर की मदद से उसकी सांसें सामान्य करने का प्रयास किया और तत्परता दिखाते हुए उसे नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने बताया कि अब बच्चे की हालत स्थिर है और वह खतरे से बाहर है।
इस सराहनीय कार्य पर पुलिस अधीक्षक कासगंज सुश्री अंकिता शर्मा ने कहा कि पुलिस का कर्तव्य केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि हर नागरिक के जीवन की रक्षा करना भी है। उन्होंने रिक्रूट आरक्षी को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित करने की घोषणा की।
मासूम के परिजनों ने भावुक होकर पुलिसकर्मी को “वर्दी में भगवान” बताया। यह घटना साबित करती है कि खाकी वर्दी केवल अधिकार का प्रतीक नहीं, बल्कि साहस और संवेदनशीलता की पहचान भी है।
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