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गंगापुर–रायपुर स्टेट हाईवे 75 पर ‘मौत के गड्ढे’, बड़े हादसे की आशंका; शीघ्र पुनर्निर्माण की उठी मांग

गंगापुर–रायपुर स्टेट हाईवे 75 पर ‘मौत के गड्ढे’, बड़े हादसे की आशंका; शीघ्र पुनर्निर्माण की उठी मांग

रिपोर्ट: सत्यनारायण सेन, गुरला

गुरला/भीलवाड़ा। भीलवाड़ा जिले से गुजर रहा स्टेट हाईवे 75 (भींडर–रामगढ़ वाया डेलाना, कोशिथल, रायपुर) इन दिनों बदहाल स्थिति में है। गंगापुर से रायपुर के बीच डेलाना, उल्लाई चौराहा, मटुनिया, देवरिया चौराहा (कीरखेड़ा), नान्दशा चौराहा और रायपुर बाईपास के आसपास सड़क पर बने गहरे गड्ढे वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में हुई दुर्घटनाओं से भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया, उल्टा समय के साथ सड़क पर नए-नए गड्ढे उभर आए हैं। बावजूद इसके, पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से समुचित मरम्मत नहीं की जा रही है। जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर तीन से चार फीट तक गहरे गड्ढे बन चुके हैं। पुलिया निर्माण के दौरान पाइप डालकर सड़क को अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे मरम्मत कार्य पूरा नहीं हो सका। दिन में वाहन चालक किसी तरह गड्ढों को देखकर रास्ता बदल लेते हैं, लेकिन रात के अंधेरे में यही गड्ढे गंभीर हादसों को आमंत्रण दे रहे हैं। इस मार्ग से प्रतिदिन दोपहिया, चौपहिया, यात्री बसें, लोडिंग वाहन और पत्थरों से भरे डंपर सहित सैकड़ों वाहन गुजरते हैं।


यह सड़क सहाड़ा विधानसभा क्षेत्र के दो प्रमुख कस्बों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। खस्ताहाल सड़क के कारण लोगों को वैकल्पिक लंबा रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के निर्माण के बाद से सड़क पर बने गड्ढों को वर्षों से नहीं भरा गया। आए दिन लोग गिरकर चोटिल हो रहे हैं। विशेषकर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए यह मार्ग जोखिम भरा बन गया है। मटुनिया से उल्लाई चौराहे तक वाहन हिचकोले खाते हुए गुजरते हैं। वहीं, कई स्थानों पर अत्यधिक ऊंचे स्पीड ब्रेकर भी दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। स्थानीय लोग इनकी ऊंचाई कम करने या मानक के अनुसार पुनर्निर्माण की मांग कर रहे हैं। हाईवे पर सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी सामने आई है। मोड़ों, आबादी क्षेत्रों और चौराहों पर संकेतक बोर्ड नहीं हैं, न ही सड़क पर सफेद रेखाएं स्पष्ट दिखाई देती हैं। इससे वाहन चालकों को दिशा और दूरी का सही अंदाजा नहीं लग पाता।ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी इस मार्ग से कई बार गुजरते हैं, लेकिन समस्या पर ठोस पहल नहीं हो रही। कुछ स्थानों पर ग्रामीणों ने स्वयं मिट्टी डालकर गड्ढे भरने का प्रयास किया, पर भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क फिर उखड़ गई। क्षेत्रवासियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि आगामी बजट में इस मार्ग के पुनर्निर्माण या व्यापक पैचवर्क की स्वीकृति दी जाए, ताकि संभावित बड़े हादसे को रोका जा सके और आमजन को सुरक्षित यात्रा का अधिकार मिल सके।

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