खनन माफिया के आगे नतमस्तक है प्रशासन? सेहरामऊ उत्तरी में अवैध खनन के आरोपों से उठे सवाल

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पीलीभीत | पूरनपुर क्षेत्र से विशेष रिपोर्ट
खनन माफिया के आगे नतमस्तक है प्रशासन? सेहरामऊ उत्तरी में अवैध खनन के आरोपों से उठे सवाल
उपजाऊ कृषि भूमि की खुदाई से किसानों की चिंता बढ़ी, जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
पीलीभीत। जिले के सेहरामऊ उत्तरी थाना क्षेत्र के गढ़वा खेड़ा, मंगदपुर और केसपुर कला सहित आसपास के इलाकों में कथित अवैध मिट्टी खनन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आए आरोपों के मुताबिक, कृषि भूमि की बड़े पैमाने पर खुदाई किए जाने से खेतों की बनावट और किसानों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीणों ने मामले में संबंधित अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ स्थानों पर खेतों की मिट्टी निकालकर गहरी खाइयां बना दी गई हैं। इससे उपजाऊ भूमि के मूल स्वरूप को नुकसान पहुंचने के साथ ही खेतों तक आने-जाने वाले रास्तों के प्रभावित होने की चिंता भी जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो खेती-किसानी से जुड़ी समस्याएं और बढ़ सकती हैं।
निगरानी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों के आरोप हैं कि कथित खनन गतिविधियां लंबे समय से जारी हैं, लेकिन प्रभावी रोकथाम नजर नहीं आ रही। ऐसे में खनन और राजस्व विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों की भूमिका, खनन की अनुमति और मौके पर हुई खुदाई की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।मामले में यह जांच भी जरूरी है कि संबंधित भूमि कृषि श्रेणी की है या नहीं, मिट्टी निकालने के लिए नियमानुसार अनुमति ली गई थी या नहीं और खुदाई निर्धारित मानकों के अनुरूप हुई अथवा नहीं। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
किसानों के हितों की सुरक्षा जरूरी
कृषि भूमि पर अनियंत्रित खुदाई से खेतों की समतलता, सिंचाई व्यवस्था और आसपास के रास्तों पर असर पड़ सकता है। ग्रामीणों की चिंता है कि इससे भविष्य में खेती करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जरूरी है कि वह केवल शिकायतों तक सीमित न रहे, बल्कि मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करे।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि राजस्व विभाग, खनन विभाग और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी संयुक्त रूप से स्थलीय निरीक्षण करें। खुदाई की गहराई, निकाली गई मिट्टी की मात्रा, भूमि की स्थिति और आवश्यक अनुमतियों की जांच कराई जाए। यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई के साथ कृषि भूमि को हुए नुकसान के आकलन पर भी ध्यान दिया जाए। अब बड़ा सवाल यह है कि संबंधित विभाग मौके पर जांच कर ग्रामीणों की शिकायतों का समाधान कब तक करेंगे? किसानों के हितों की रक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए निष्पक्ष जांच तथा पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक है।
नोट: यह समाचार उपलब्ध समाचार सामग्री एवं स्थानीय स्तर पर लगाए गए आरोपों पर आधारित है। संबंधित विभागों और आरोपित पक्ष का आधिकारिक बयान मिलने पर उसे भी समाचार में शामिल किया जाना चाहिए।
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