#SvasJsNewsउत्तर प्रदेशपुलिस विभागप्रयागराजब्रेकिंग न्यूज़मेरठ

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती से पुलिस महकमे में हलचल, आरोपी को पेश न करने पर SSP को होना पड़ा अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित

ब्यूरो रिपोर्ट उत्तर प्रदेश

शादी का वादा कर मुकरने के मामले में हाईकोर्ट सख्त, मेरठ SSP को 45 मिनट तक खड़ा रखा

उत्तर प्रदेश | प्रयागराज/मेरठ SvasJsNews | जनहित की आवाज़

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती से पुलिस महकमे में हलचल, आरोपी को पेश न करने पर SSP को होना पड़ा अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित

उत्तर प्रदेश से न्यायपालिका और पुलिस की जवाबदेही से जुड़ा एक अहम मामला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के आरोपी को अदालत में पेश नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया। मामले में मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत में उन्हें करीब 45 मिनट तक खड़ा रखा गया। मामला आरोपी नितीश उर्फ सिद्धांत उर्फ सेठी से जुड़ा है। आरोप है कि उसने पीड़िता से शादी करने का वादा किया था और इसी आधार पर जमानत की मांग की थी। मार्च 2026 में जमानत मिलने के बाद आरोपी कथित तौर पर अपने वादे से मुकर गया। इसके बाद पीड़िता ने न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पीड़िता की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत रद्द कर दी और उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया। इसके बावजूद आरोपी को कई तारीखों पर अदालत में पेश नहीं किया जा सका। आरोपी की पेशी सुनिश्चित नहीं होने पर न्यायालय ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाई। बताया गया है कि 8 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने मेरठ के SSP को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया था। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर न्यायालय के आदेशों के अनुपालन और पुलिस की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

न्यायिक आदेशों का पालन क्यों जरूरी?

किसी भी आपराधिक मामले में अदालत के आदेशों का समय पर पालन करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। खासकर महिलाओं से जुड़े गंभीर आरोपों वाले मामलों में पीड़िता को न्याय दिलाने, आरोपी की कानूनी प्रक्रिया के तहत पेशी सुनिश्चित करने और न्यायिक आदेशों का अनुपालन करने की अहमियत और बढ़ जाती है। यह मामला संदेश देता है कि न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही को अदालत गंभीरता से ले सकती है। हालांकि, मामले के सभी तथ्यों और अदालत की टिप्पणियों की पुष्टि आधिकारिक आदेश से की जानी चाहिए।

SvasJsNews | जनहित की आवाज़
भ्रष्टाचार पर कसेगा नकेल

Related Articles

Back to top button